इस तरह दूध पीना पड़ सकता है भारी! पति-पत्नी दोनों को लि.वर कै.ंसर का पता चला
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घुटनों और जोड़ों की कमजोरी से पाएं प्राकृतिक व आसान राहत।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। अक्सर 50, 60 या 70 वर्ष की आयु के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है चलने-फिरने में होने वाली असुविधा। सुबह उठते ही घुटनों में जकड़न महसूस होना, सीढ़ियां चढ़ते समय पैरों में खिंचाव या उठते-बैठते समय जोड़ों में दर्द होना एक आम समस्या बन जाती है। कई बार लोग सोचते हैं कि इसके लिए भारी कसरत करनी पड़ेगी, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भारी व्यायाम करना संभव नहीं होता।
भारतीय आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान में हमारे खान-पान को ही सबसे बड़ी औषधि माना गया है। रसोई में मौजूद साधारण सी चीजें हमारे जोड़ों को अंदर से पोषण देकर उन्हें लचीला और मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि किस तरह एक साधारण प्राकृतिक उपाय और सही दिनचर्या आपके पैरों और जोड़ों को नई ताकत दे सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ हमारी हड्डियों के सिरों के बीच मौजूद प्राकृतिक चिकनाई (जिसे कार्टिलेज और श्लेष द्रव या सिनोवियल फ्लुइड कहा जाता है) कम होने लगती है। जब यह चिकनाई घट जाती है, तो हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे सूजन, लालिमा और दर्द की स्थिति पैदा होती है।
इसके अलावा, शरीर में वात दोष का असंतुलन, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, तथा कम सक्रिय जीवनशैली भी जोड़ों की समस्याओं को बढ़ा देती है। जब घुटने कमजोर होते हैं, तो व्यक्ति का चलना-फिरना कम हो जाता है, जिससे जोड़ और अधिक सख्त होने लगते हैं।
प्राचीन समय से ही शुद्ध देसी घी को जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी माना गया है। शुद्ध गाय का घी केवल भोजन का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह शरीर को भीतर से चिकनाई और ऊर्जा प्रदान करता है।
जोड़ों के पोषण के लिए एक बहुत ही सरल और प्रभावी नुस्खा तैयार किया जा सकता है। इसके लिए आपको केवल कुछ बुनियादी घरेलू सामग्रियों की आवश्यकता होती है:

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और सोंठ में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व घी के साथ मिलकर जोड़ों की गहराई तक पोषण पहुंचाते हैं।
केवल आंतरिक पोषण ही नहीं, बाहरी देखभाल भी बेहद जरूरी है। आइए जानें 3 ऐसे तरीके जिनका नियमित उपयोग घुटनों को आराम पहुंचाता है:
तिल का तेल या सरसों का तेल हल्का गुनगुना करके रोजाना रात को सोने से पहले घुटनों और जोड़ों पर हल्के हाथों से 5 से 10 मिनट मालिश करें। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों का तनाव दूर होता है।
रात को एक चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को छानकर पिएं और दानों को चबा लें। मेथी जोड़ों के दर्द और वात रोगों को दूर करने में बेहद असरदार मानी जाती है।
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मालिश के बाद या दिन में किसी भी समय हल्के गर्म पानी की थैली या सूती कपड़े में गर्म नमक की पोटली बनाकर घुटनों की सिकाई करें। इससे जकड़न तुरंत खुलती है और हल्कापन महसूस होता है।
बिना कठिन कसरत के भी आप अपने पैरों को सक्रिय रख सकते हैं:
उम्र चाहे जो भी हो, सही खान-पान और साधारण प्राकृतिक उपायों से जोड़ों की तकलीफ को कम किया जा सकता है। सुबह 5 ग्राम देसी घी का सही तरीके से सेवन और नियमित मालिश आपको बिना किसी भारी व्यायाम के भी पैरों में हल्कापन और सहजता प्रदान कर सकती है। प्राकृतिक उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और खुशहाल, सक्रिय जीवन का आनंद लें।
(नोट: यदि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है या आप किसी विशेष आहार पर हैं, तो किसी भी नए उपाय को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।)
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