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जानिए टीवी पर लाइव मैच की एडिटिंग और प्रसारण कैसे होता है।
जब भी हम टीवी या मोबाइल पर कोई लाइव क्रिकेट मैच देखते हैं, तो चौका-छक्का लगने या विकेट गिरने के तुरंत बाद कई अलग-अलग एंगल से रीप्ले, स्लो-मोशन वीडियो और सटीक आंकड़े स्क्रीन पर दिखने लगते हैं। यह सब कुछ इतनी तेजी से होता है कि लगता है जैसे कोई जादू हो रहा हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मैदान में गेंद फेंके जाने के महज दो-तीन सेकंड के भीतर यह बेहतरीन लाइव एडिटिंग कैसे पूरी होती है?
सीधे शब्दों में कहें तो लाइव मैच की कोई पारंपरिक वीडियो एडिटिंग नहीं होती, बल्कि यह रीयल-टाइम विज़न मिक्सिंग (Real-Time Vision Mixing) और मल्टी-कैमरा ब्रॉडकास्टिंग की अत्याधुनिक तकनीक है। मैदान के बाहर खड़ी एक विशाल ‘ओबी वैन’ (Outside Broadcast Van) या प्रोडक्शन कंट्रोल रूम में बैठे दर्जनों तकनीकी विशेषज्ञ, वीडियो डायरेक्टर और रीप्ले ऑपरेटर्स मिलकर हर एक सेकंड को लाइव एडिट और डायरेक्ट करते हैं। आइए समझते हैं इस पूरी प्रक्रिया के पीछे का तकनीकी तंत्र।

मैदान के बाहर खड़ी विशाल बस जैसी वैन को ओबी वैन (OB Van) कहा जाता है। इसे आप एक चलता-फिरता हाई-टेक स्टूडियो समझ सकते हैं। इस वैन के भीतर एक विशालकाय कंट्रोल रूम होता है, जहां दर्जनों मॉनिटर लगे होते हैं।
लाइव प्रसारण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मैच में 30 से 40 विशेष कैमरों का जाल बिछाया जाता है। हर कैमरे का अपना एक तय काम होता है:
ये कैमरे पिच के दोनों सिरों पर ऊंचाई पर लगे होते हैं, जो गेंदबाज के रन-अप और बल्लेबाज के शॉट को मुख्य रूप से दिखाते हैं।
ये विशेष कैमरे प्रति सेकंड 500 से 1000 फ्रेम (Frames Per Second) रिकॉर्ड करते हैं। जब कोई बल्लेबाज शॉट खेलता है या गेंद बल्ले के किनारे को छूती है, तो यही कैमरे गेंद की हर बारीक हरकत को बेहद धीमे अंदाज में दिखाते हैं।
मैदान के ऊपर तारों के सहारे लटकने वाला यह कैमरा हवा में तेजी से घूमते हुए खिलाड़ियों के क्लोज-अप और ऊपर से पूरे ग्राउंड का विहंगम दृश्य दिखाता है।
स्टंप्स के अंदर बेहद छोटे लेंस वाले कैमरे लगे होते हैं, जो सीधे पिच लेवल का एक्शन कैप्चर करते हैं।
लाइव मैच में सबसे रोमांचक हिस्सा होता है तुरंत मिलने वाला स्लो-मोशन रीप्ले। यह काम EVS (Electronic Video Systems) और LSM ऑपरेटर्स द्वारा किया जाता है।

स्क्रीन के नीचे जो स्कोर पट्टी, खिलाड़ियों के आंकड़े, रन रेट और चौके-छक्के के एनिमेशन आते हैं, उन्हें लाइव ग्राफिक्स टीम संभालती है।
डीआरएस (DRS) और थर्ड अंपायर के फैसलों के समय दिखाई जाने वाली तकनीक पूरी तरह कंप्यूटर एल्गोरिदम और हाई-स्पीड ट्रैकिंग पर आधारित होती है।
वीडियो के साथ-साथ आवाज का तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऑडियो कंट्रोल रूम में साउंड इंजीनियर निम्नलिखित ध्वनियों को संतुलित करते हैं:
तकनीकी रूप से जिसे हम ‘लाइव’ कहते हैं, वह वास्तव में मैदान की वास्तविक घटना से लगभग 7 से 10 सेकंड पीछे होता है। इस मामूली अंतर को ब्रॉडकास्ट डिले (Broadcast Delay) कहा जाता है।
यह देरी सैटेलाइट सिग्नल ट्रांसमिशन, ग्राफिक्स रेंडरिंग, विभिन्न कैमरों की प्रोसेसिंग और तकनीकी सुरक्षा मानकों के कारण आती है। इसी कुछ सेकंड के बफर के भीतर तकनीकी टीम को रीप्ले तैयार करने और सही कैमरा एंगल चुनने का समय मिलता है।
लाइव क्रिकेट मैच का प्रसारण सिर्फ कैमरे पकड़ने का काम नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीक, हाई-स्पीड कंप्यूटिंग और सैकड़ों कुशल तकनीशियनों के आपसी तालमेल की एक बेमिसाल मिसाल है। मैदान पर होने वाली हर एक गतिविधि को कुछ ही सेकंडों में एक सिनेमाई अनुभव बनाकर हमारे ड्राइंग रूम तक पहुंचाना आधुनिक ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग का एक अद्भुत चमत्कार है।
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