रात में बार-बार पैरों में ऐंठन को नज़रअंदाज़ न करें! जानिए इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं

रात को अचानक नींद से जाग जाना और पिंडली या पैर की मांसपेशियों में तेज़ ऐंठन महसूस होना बेहद दर्दनाक हो सकता है। कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक रहने वाली यह समस्या आम है और ज्यादातर मामलों में गंभीर नहीं होती। लेकिन अगर रात में पैरों में ऐंठन बार-बार होने लगे, नींद खराब करने लगे या इसके साथ सूजन, सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी दिखाई दे, तो इसे केवल सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

चिकित्सकीय भाषा में इसे Nocturnal Leg Cramps कहा जाता है। यह आमतौर पर पिंडली की मांसपेशियों में अचानक और अनैच्छिक संकुचन के कारण होता है। American Family Physician में प्रकाशित एक चिकित्सकीय समीक्षा के अनुसार, लगभग 50–60% वयस्कों को जीवन में कभी न कभी रात में पैरों में ऐंठन का अनुभव हो सकता है।

रात में पैरों में ऐंठन क्यों होती है?

हर मामले का एक निश्चित कारण नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, मांसपेशियों की थकान और नसों के काम करने में बदलाव इसकी संभावित वजहों में शामिल हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ सकता है।

कुछ परिस्थितियां भी ऐंठन की संभावना बढ़ा सकती हैं, जैसे:

  • शरीर में पानी की कमी
  • लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता
  • बहुत अधिक या अचानक बढ़ा हुआ व्यायाम
  • गर्भावस्था
  • लंबे समय तक मांसपेशियों पर दबाव
  • कुछ दवाओं का सेवन
  • किडनी से जुड़ी समस्याएं
  • मधुमेह के कारण नसों को नुकसान
  • पैरों में रक्त प्रवाह से जुड़ी समस्याएं
  • कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

Mayo Clinic के अनुसार, रात में होने वाली पैर की ऐंठन का संबंध कभी-कभी हाइपरथायरॉइडिज्म, हाइपोथायरॉइडिज्म, डायबिटीज, किडनी की बीमारी, स्पाइनल स्टेनोसिस और peripheral neuropathy जैसी स्थितियों से भी हो सकता है। हालांकि, केवल पैर में ऐंठन होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को इनमें से कोई बीमारी है।

ऐंठन होने पर तुरंत क्या करें?

अगर रात में अचानक पैर में ऐंठन हो जाए, तो घबराने के बजाय प्रभावित मांसपेशी को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें।

पिंडली में ऐंठन होने पर पैर को सीधा करें और पंजे को अपनी ओर खींचने की कोशिश करें। प्रभावित मांसपेशी की हल्की मालिश करना, खड़े होकर पैर पर धीरे-धीरे वजन डालना या कुछ कदम चलना भी राहत दे सकता है। गर्म पानी से नहाना या प्रभावित हिस्से पर गर्म पानी डालना कुछ लोगों को आराम दे सकता है।

क्या ज्यादा पानी पीने या मैग्नीशियम लेने से समस्या खत्म हो जाएगी?

यह मान लेना सही नहीं है कि हर रात होने वाली ऐंठन केवल मैग्नीशियम या किसी दूसरे मिनरल की कमी के कारण होती है।

2023 में American Family Physician में प्रकाशित एक समीक्षा में 11 randomized controlled trials और कुल 735 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि सामान्य रात की पैर की ऐंठन वाले लोगों में मैग्नीशियम सप्लीमेंट से स्पष्ट लाभ का मजबूत प्रमाण नहीं है।

इसलिए बिना जांच के लगातार मैग्नीशियम, पोटैशियम या अन्य सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। यदि शरीर में किसी पोषक तत्व की वास्तविक कमी है, तो डॉक्टर उसकी पहचान करके उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं।

रोज़ाना कुछ आसान आदतें मदद कर सकती हैं

रात में ऐंठन की समस्या से बचने के लिए कुछ सरल उपाय आज़माए जा सकते हैं:

1. सोने से पहले स्ट्रेचिंग करें
पिंडली की हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकती है। NHS भी नियमित calf-stretching को संभावित रूप से उपयोगी बताता है।

2. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें
डिहाइड्रेशन कुछ लोगों में ऐंठन की संभावना बढ़ा सकता है। पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना उपयोगी हो सकता है।

3. व्यायाम की तीव्रता अचानक न बढ़ाएं
बहुत अधिक व्यायाम या मांसपेशियों पर अचानक बढ़ा हुआ दबाव ऐंठन को बढ़ा सकता है, खासकर जब शरीर उस गतिविधि का आदी न हो।

4. लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें
यदि आपका काम लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाला है, तो बीच-बीच में पैर हिलाना और हल्का चलना उपयोगी हो सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

कभी-कभार होने वाली कुछ सेकंड की ऐंठन आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होती। लेकिन अगर ऐंठन बार-बार होने लगे और नींद प्रभावित करे, 10 मिनट से ज्यादा चले, या इसके साथ पैरों में सूजन, सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

खास तौर पर अगर ऐंठन लगातार बढ़ रही हो या पहले से कोई किडनी, नसों, रक्त प्रवाह या अन्य पुरानी बीमारी हो, तो इसके संभावित कारण की जांच कराना महत्वपूर्ण है।

याद रखें: रात में पैर में ऐंठन होना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, आपकी नींद और रोज़मर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रही है, तो इसका कारण जानना बेहतर है। केवल सप्लीमेंट लेने के बजाय पहले अपनी दिनचर्या, पानी का सेवन, व्यायाम और चल रही दवाओं पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

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