पड़ोसी ने दी ऐसी अजीब चीज़, पहले तो पहचान ही नहीं पाए लोग!
अगर कोई आपको काले रंग की, बेहद सख्त और नुकीले सींगों वाली इन चीज़ों से भरी एक थैली दे दे,…
अगर कोई आपको काले रंग की, बेहद सख्त और नुकीले सींगों वाली इन चीज़ों से भरी एक थैली दे दे, तो शायद आपका पहला सवाल भी यही होगा—“आखिर ये हैं क्या?”
पहली नजर में ये किसी अजीब फल, बीज या यहां तक कि किसी जानवर के सींग जैसी दिखाई देती हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि ये वास्तव में खाने योग्य जलीय फल हैं, जिन्हें कई एशियाई देशों में लंबे समय से भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इन्हें आमतौर पर Water Caltrop कहा जाता है। भारत में इसी समूह के फलों को सिंघाड़ा (सिंघारा) कहा जाता है। वैज्ञानिक रूप से यह Trapa वंश का फल है और पानी में उगने वाले पौधे से मिलता है। इसके फल के दोनों तरफ निकले हुए नुकीले हिस्से इसकी सबसे खास पहचान हैं।

बाहर से देखने पर यह फल लगभग लकड़ी जैसा कठोर और काला दिखाई दे सकता है। लेकिन इसके सख्त खोल के अंदर एक सफेद, स्टार्चयुक्त बीज होता है, जिसे खाया जाता है।
Water caltrop के बीज में स्टार्च की मात्रा काफी अधिक होती है। एक शोध समीक्षा के अनुसार, फल के सूखे kernel में स्टार्च इसकी प्रमुख पोषण सामग्री है, जो इसके खाद्य स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण होने का एक कारण है।
यानी बाहर से जितना अजीब दिखाई देता है, अंदर से उतना ही सामान्य खाद्य पदार्थ निकलता है।
अगर आपके पास भी ऐसे फल आए हैं, तो सीधे कच्चे खाने के बजाय पहले यह सुनिश्चित करें कि वे खाद्य water caltrop ही हैं और उन्हें अच्छी तरह पकाएं।
सबसे आम तरीका है इन्हें उबालना।
पहले फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। इसके बाद इन्हें छिलके सहित पानी में उबाला जाता है। पकने के बाद सख्त खोल को सावधानी से तोड़ा जाता है और अंदर मौजूद सफेद बीज निकाला जाता है।
कुछ पाक परंपराओं में इन्हें भूनकर भी खाया जाता है, जबकि सूखे बीजों को पीसकर आटा बनाया जा सकता है। भारत में सिंघाड़े को सुखाकर बनाए गए आटे का इस्तेमाल भी पारंपरिक रूप से किया जाता है।
ध्यान रखें: इसके नुकीले खोल को दांतों से तोड़ने की कोशिश न करें। पकने के बाद भी खोल काफी कठोर रह सकता है, इसलिए किसी उपयुक्त उपकरण से सावधानीपूर्वक खोलना बेहतर है।

यहीं थोड़ी सावधानी जरूरी है।
कुछ प्रकार के water caltrop के युवा फल कच्चे खाए जाने की जानकारी मिलती है, लेकिन कच्चे फल को खाने की सलाह सभी किस्मों और सभी परिस्थितियों के लिए समान नहीं है। कुछ स्रोतों में कच्चे बीज में ऐसे प्राकृतिक यौगिकों का उल्लेख है जो पकाने से निष्क्रिय हो जाते हैं। इसलिए अगर आपको फल की सही पहचान या उसकी तैयारी के बारे में भरोसा नहीं है, तो कच्चा खाने के बजाय अच्छी तरह पकाना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
इसके अलावा, पानी में उगने वाले खाद्य पदार्थों की स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। दूषित जल के संपर्क में आने वाले खाद्य पदार्थों पर हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, इसलिए खाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना और उचित तरीके से पकाना जरूरी है।
इसे खाने वाले लोग अक्सर इसके स्वाद और बनावट की तुलना चेस्टनट से करते हैं।
पका हुआ बीज हल्का मीठा, स्टार्चयुक्त और कुछ हद तक सूखा या crumbly हो सकता है। इसे अकेले खाने के अलावा चावल, सब्जियों या दूसरे व्यंजनों में भी मिलाया जाता है।
फिलीपींस के Food Composition Table में उबले हुए water caltrop में प्रति 100 ग्राम edible portion लगभग 226 kcal और 46.8 ग्राम carbohydrate दर्ज किया गया है, जो बताता है कि इसका बीज मुख्य रूप से ऊर्जा देने वाले स्टार्चयुक्त भोजन के रूप में उपयोगी है।
अगली बार अगर आपको ऐसी काली, नुकीली और अजीब दिखने वाली चीज़ दिखाई दे, तो तुरंत इसे बेकार या जहरीला समझने की जरूरत नहीं है।
यह संभवतः water caltrop यानी सिंघाड़ा हो सकता है—एक ऐसा फल जिसका बाहरी रूप देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि इसके अंदर खाने योग्य सफेद बीज छिपा है।
लेकिन अगर फल किसी जंगली या अज्ञात जलस्रोत से खुद इकट्ठा किया गया है और उसकी पहचान पक्की नहीं है, तो सिर्फ तस्वीर देखकर उसे खाने की कोशिश न करें। सही पहचान और सुरक्षित खाद्य स्रोत की पुष्टि सबसे पहले जरूरी है।
बाहर से डरावना…
अंदर से खाने योग्य! 😳
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