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गोद लिए नवजात के घर आते ही पति की उस एक हरकत ने बिखेर दिया खुशियों का संसार: आंसुओं में डूबी एक अभागी मां की रूह कंपा देने वाली दास्तान

शरद ऋतु की उस ठंडी दोपहर जब सारा और मार्क अस्पताल के भारी कांच के दरवाजों से बाहर निकले, तो उनके चेहरे पर वर्षों की अधूरी तपस्या के पूरे होने की चमक थी। सारा की बाहों में सफेद और हल्के हरे रंग की सूती चादर में लिपटा हुआ एक नन्हा सा फरिश्ता था। उस नन्हीं जान का नाम उन्होंने लियो रखा था। शादी के पूरे नौ साल बाद, अनगिनत आंसुओं, सैकड़ों नाकाम डॉक्टरी कोशिशों और समाज के ताने-बाने झेलने के बाद, उन्होंने एक अनाथालय से इस बच्चे को कानूनी रूप से अपना बनाया था। मार्क, जो शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में इतिहास का प्रोफेसर था, बच्चे के चेहरे को देखकर गर्व से फूला नहीं समा रहा था। उसने अपने हरे रंग की टी-शर्ट की आस्तीन को ऊपर चढ़ाते हुए बच्चे के माथे को धीरे से छुआ और अपनी पत्नी की कमर पर हाथ रखकर कहा कि अब उनका घर सचमुच एक घर बन गया है। अस्पताल के कमरे में उन्होंने जो पहली तस्वीर खिंचवाई थी, उसमें सारा की आँखों से खुशी के आंसू बह रहे थे और मार्क की मुस्कान में एक नया आत्मविश्वास झलक रहा था। किसी को भी यह गुमान नहीं था कि जिस घर की चौखट पर आज खुशियों का अमृत बरस रहा था, वहीं एक ऐसा ज़हरीला तूफान दबे पांव इंतजार कर रहा था जो सब कुछ तबाह करने वाला था।

घर पहुँचते ही सारा ने लियो को उसके नए, हल्के नीले रंग से सजे कमरे के झूले में लिटाया। दीवारों पर नन्हे बादलों और सितारों की पेंटिंग बनी हुई थी, जिसे मार्क ने पिछले हफ्ते खुद अपने हाथों से तैयार किया था। सारा का मन मातृत्व के अपार आनंद से सराबोर था। वह रसोई में जाकर बच्चे के लिए गर्म पानी और दूध की बोतल तैयार करने लगी। मार्क बैठक में सोफे पर बैठा हुआ था। सारा जब रसोई से बाहर आई, तो उसने देखा कि मार्क की नजरें खाली कमरे में किसी अदृश्य बिंदु पर टिकी हुई थीं। उसके चेहरे का रंग हल्का पीला पड़ चुका था और उसकी उंगलियां अजीब तरह से कांप रही थीं। सारा ने सोचा कि शायद अचानक आई इस बड़ी जिम्मेदारी का अहसास उसे थोड़ा असहज कर रहा है। उसने मार्क के कंधे पर हाथ रखा और प्यार से मुस्कुराते हुए कहा कि वे दोनों मिलकर हर मुश्किल आसान कर लेंगे। मार्क ने एक फीकी मुस्कान के साथ सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों में जो गहरा डर और पछतावे का समंदर तैर रहा था, उसे सारा उस पल पढ़ न सकी।

शाम ढलते-ढलते घर का माहौल अजीब तरह से भारी होने लगा। बाहर तेज हवाएं चलने लगी थीं और खिड़कियों के शीशे खड़खड़ा रहे थे। लियो झूले में शांति से सो रहा था, उसकी गुलाबी हथेलियां मुट्ठियों में बंद थीं। डिनर की मेज पर जब दोनों बैठे, तो मार्क ने खाने को छुआ तक नहीं। वह बस बार-बार अपने फोन की स्क्रीन देख रहा था और पानी का गिलास खाली कर रहा था। अचानक मार्क उठा और उसने कहा कि उसके सिर में तेज दर्द हो रहा है और वह थोड़ा टहलने बाहर जा रहा है। सारा को थोड़ा अजीब लगा क्योंकि शहर में ठंड बढ़ रही थी और मार्क आमतौर पर रात को बाहर नहीं निकलता था। फिर भी, उसने सोचा कि शायद नई शुरुआत के तनाव को कम करने के लिए उसे थोड़े अकेलेपन की जरूरत है। मार्क के बाहर जाते ही सारा बच्चे के कमरे में लौट आई। उसने लियो को अपनी छाती से चिपका लिया। उस नन्हीं धड़कन की आवाज़ सारा के दिल को असीम सुकून दे रही थी। वह खुद से कह रही थी कि जिंदगी ने चाहे कितने भी इम्तिहान लिए हों, इस मासूम के आने से हर जख्म भर गया है।

रात के करीब ग्यारह बजे मार्क वापस लौटा। उसके कपड़े थोड़े भीगे हुए थे और उसकी सांसें बेतरतीब चल रही थीं। सारा ने देखा कि उसके हाथों में एक पुराना, मुड़ा हुआ भूरा लिफाफा था। मार्क सीधे अध्ययन कक्ष में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सारा ने दरवाजे पर हल्की दस्तक दी और पूछा कि क्या सब ठीक है। अंदर से मार्क की भारी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ आई कि वह कुछ जरूरी कागजात देख रहा है और सारा को सो जाना चाहिए। सारा बच्चे के झूले के पास ही सोफे पर लेट गई। उसे गहरी नींद नहीं आ रही थी; मातृत्व की एक नई सतर्कता उसकी रगों में दौड़ रही थी। आधी रात के सन्नाटे में जब सारा की आँख खुली, तो उसने देखा कि अध्ययन कक्ष का दरवाजा खुला हुआ था और मार्क लियो के झूले के पास झुका हुआ खड़ा था। कमरे की मद्धिम रोशनी में मार्क की परछाई बहुत डरावनी लग रही थी। उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था और वह बच्चे को इस तरह देख रहा था मानो वह कोई मासूम बच्चा न होकर उसका अतीत का कोई भयानक साया हो।

सारा धीरे से उठी और जैसे ही उसने मार्क के करीब कदम बढ़ाया, उसने देखा कि मार्क के हाथ में वही भूरा लिफाफा था, जिस पर शहर के सबसे बड़े निजी अनाथालय की मुहर लगी हुई थी। मार्क के होंठ कांप रहे थे और वह फुसफुसा रहा था कि यह नहीं हो सकता, किस्मत ऐसा क्रूर मजाक नहीं कर सकती। सारा ने घबराकर पूछा कि बात क्या है और वह लिफाफे में क्या देख रहा है। मार्क ने चौंककर सारा की तरफ देखा। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन उन आंसुओं में दर्द से ज्यादा एक गहरा अपराधबोध था। मार्क ने बिना कुछ कहे वह लिफाफा अपनी जेब में ठूंस लिया और तेजी से कमरे से बाहर निकलकर रसोई की ओर भागा। सारा उसके पीछे गई। रसोई में जाकर मार्क ने वह लिफाफा काउंटर पर पटक दिया और खुद फर्श पर बैठकर दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ लिया। उसने जो कुछ उस रात सारा को बताया, उसने सारा के पैरों तले की जमीन को पाताल में धकेल दिया।

मार्क ने सिसकते हुए कबूल किया कि यह बच्चा कोई अनजान अनाथ नहीं था, जिसे उन्होंने किस्मत के भरोसे चुन लिया था। सच्चाई यह थी कि मार्क का अतीत एक गहरे, काले रहस्य से भरा हुआ था। आज से करीब सवा साल पहले, जब सारा अपने गंभीर डिप्रेशन के इलाज के लिए छह महीने के लिए दूसरे शहर में अपने मायके गई हुई थी, मार्क अकेला पड़ गया था। उस अकेलेपन और नशे की एक कमजोर रात में उसने अपनी एक पूर्व छात्रा और सहकर्मी, हेलेना के साथ सीमाएं लांघ दी थीं। वह एक रात की गलती थी, जिसे मार्क ने हमेशा के लिए दबा देना चाहा था। लेकिन कुछ महीनों बाद हेलेना गर्भवती हो गई। बदनामी और सामाजिक प्रतिष्ठा खोने के डर से मार्क ने हेलेना पर उस शहर को छोड़ने और बात को छुपाने का भारी दबाव बनाया था। हेलेना, जो पहले से ही अनाथ और बेसहारा थी, उस शहर के एक दूरदराज इलाके में अकेली रहने लगी थी। जन्म देने के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी और अपने अंतिम दिनों में उसने बच्चे को उसी अनाथालय की देखरेख में सौंप दिया था, जहां मार्क के एक पुराने परिचित डॉक्टर काम करते थे। हेलेना ने बच्चे की पहचान छुपाए रखने की शर्त रखी थी, लेकिन अपनी मौत से पहले उसने एक पत्र छोड़ा था, जिसमें उसने लिखा था कि अगर बच्चे के पिता में कभी इंसानियत जागे, तो वह इस बच्चे को अनाथालय की अंधेरी दीवारों से निकाल ले।

मार्क ने वह पत्र आज तक नहीं देखा था। उसने केवल यह सुनिश्चित किया था कि अनाथालय में बच्चे को किसी भी तरह कानूनी तौर पर सारा की गोद में डाल दिया जाए ताकि वह अपने पाप का प्रायश्चित भी कर सके और सारा के बच्चे के सपने को भी पूरा कर सके, बिना यह सच बताए कि वह बच्चा वास्तव में मार्क का अपना ही खून था। लेकिन उस भूरे लिफाफे में जो कागजात थे, वे सिर्फ हेलेना का अंतिम पत्र नहीं थे; उसमें हेलेना की मेडिकल रिपोर्ट और एक डायरी के पन्ने थे, जो अनाथालय के डायरेक्टर ने आज शाम मार्क को सौंपे थे। उन पन्नों में हेलेना ने अपनी आखिरी सांसों में उस असीम दर्द, तन्हाई और उस विश्वासघात का ब्योरा लिखा था जो मार्क ने उसके साथ किया था। उसने लिखा था कि जिस पिता ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अपनी ही अजन्मी संतान और उसकी मां को बेसहारा मरने के लिए छोड़ दिया, वह इस बच्चे की मासूमियत के साए में भी कभी सुकून नहीं पा सकेगा।

यह सुनते ही सारा का कलेजा फट गया। जिस पति को वह अपना रक्षक, अपना देवता और एक सच्चा जीवनसाथी समझती आई थी, वह असल में एक कायर, धोखेबाज और एक बेबस औरत की बर्बादी का जिम्मेदार निकला। सारा की आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। उसने जिस बच्चे को अभी-अभी अपनी आत्मा का हिस्सा माना था, वह उसके पति के विश्वासघात का जीवंत प्रमाण था। सारा की चीखें रसोई की दीवारों से टकराने लगीं। उसने मार्क के सीने पर अपनी मुट्ठियां मारते हुए पूछा कि उसने उसके साथ इतना बड़ा छल क्यों किया। मार्क सिर्फ फर्श पर पड़ा रो रहा था और माफी की भीख मांग रहा था। उसने कहा कि उसने यह सब सिर्फ सारा की खुशियों के लिए किया ताकि सारा को एक बच्चा मिल सके और वह खुद भी अपने गुनाह के बोझ को हल्का कर सके। लेकिन सारा के लिए यह माफी के काबिल नहीं था; यह उसके आत्मसम्मान, उसके नौ साल के पवित्र विश्वास और एक अभागी मरी हुई औरत की आत्मा के साथ किया गया सबसे जघन्य खिलवाड़ था।

उस रात घर में एक भी पल कोई सो न सका। अगली सुबह जब सूरज की किरणें खिड़की से अंदर आईं, तो वे किसी नई सुबह का संदेश नहीं लाई थीं, बल्कि उस घर की राख को उजागर कर रही थीं। मार्क का मानसिक संतुलन बुरी तरह बिगड़ने लगा था। अपने किए का पछतावा, हेलेना की अंतिम चिट्ठी के शब्दों का खौफ और सारा की नफरत भरी नजरें उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थीं। वह दिनभर अपने कमरे में बंद रहा। सारा ने बच्चे को गोद से अलग नहीं किया; उस मासूम का इस पूरे फरेब में कोई कसूर नहीं था, लेकिन जब भी वह बच्चे के मासूम चेहरे को देखती, उसे उस अनाम मां का दर्द महसूस होता जिसने तन्हाई में दम तोड़ दिया था। सारा ने अपने दिल में एक कड़ा फैसला ले लिया था। वह इस झूठ की बुनियाद पर टिके रिश्ते में एक पल भी नहीं रह सकती थी।

तीसरे दिन की शाम एक ऐसी त्रासदी लेकर आई जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मार्क अपनी कार लेकर बिना बताए कहीं चला गया था। कई घंटों तक जब उसका कोई पता नहीं चला, तो सारा ने पुलिस को सूचना दी। आधी रात को पुलिस की गाड़ी उनके दरवाजे पर रुकी। शहर के बाहर उसी सुनसान पुल के पास, जहां मार्क अक्सर अपनी पुरानी यादों में जाया करता था, उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त पाई गई थी। मार्क ने अत्यधिक मानसिक तनाव और शराब के नशे में गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया था और गाड़ी सीधे एक विशाल पेड़ से टकरा गई थी। जब रेस्क्यू टीम ने उसे मलबे से बाहर निकाला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मार्क अपने पीछे पछतावे का एक ऐसा पहाड़ छोड़ गया था जिसे कोई कभी हटा नहीं सकता था।

कुछ ही दिनों बाद, शहर के कब्रिस्तान में एक दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। मूसलाधार बारिश हो रही थी। काले छातों के नीचे खड़े कुछ गिने-चुने रिश्तेदार और परिचित सिर झुकाए खड़े थे। फूलों से सजे ताबूत के ऊपर सफेद लिली के फूल रखे हुए थे। ताबूत के ठीक पास सारा खड़ी थी, उसका पूरा शरीर आंसुओं से भीगा हुआ था और वह अपने चेहरे को हाथों से छिपाए बेसुध होकर रो रही थी। पास ही मार्क की वृद्ध मां और रिश्तेदार उस ताबूत पर हाथ रखकर चीत्कार कर रहे थे। उस भीगी हुई मिट्टी में एक तरफ वह पति दफन हो रहा था जिसने जिंदगी भर झूठ का नकाब ओढ़े रखा, और दूसरी तरफ खड़ी थी वह अभागी स्त्री जिसकी दुनिया एक ही झटके में वीरान हो चुकी थी।

अंतिम संस्कार के बाद जब सारा उस खाली, बड़े घर में अकेली लौटी, तो घर की हर दीवार उसे काटने को दौड़ रही थी। मार्क का कमरा, उसकी किताबें, उसका चश्मा, सब कुछ वहीं था, लेकिन वह खुद अपने पापों की सजा पाकर इस दुनिया से जा चुका था। सारा बैठक के फर्श पर बैठ गई। उसका दिल चाह रहा था कि वह भी सब कुछ खत्म कर दे। तभी अचानक दूसरे कमरे से लियो के रोने की हल्की सी आवाज़ गूंजी। वह आवाज़ सारा के कानों में किसी अलौकिक पुकार की तरह टकराई। सारा उठी, उसके कदम लड़खड़ा रहे थे, लेकिन वह उस कमरे की ओर बढ़ी।

उसने लियो को अपनी बाहों में उठा लिया। बच्चे ने रोना बंद कर दिया और अपनी बड़ी-बड़ी, भूरी आँखों से सारा को देखने लगा—वे आँखें जो बिल्कुल उस अभागी हेलेना जैसी थीं, जिसे इस दुनिया ने कभी इंसाफ नहीं दिया था। सारा ने उस नन्हे बच्चे को अपने सीने से जोर से भींच लिया और उसकी पेशानी पर एक गहरा चुंबन दिया। उसने अपने मन में संकल्प लिया कि मार्क ने चाहे जो भी पाप किया हो, हेलेना की आत्मा को शांति दिलाने का एकमात्र रास्ता यही है कि वह इस बच्चे को दुनिया का सबसे अच्छा इंसान बनाए। उसने फैसला किया कि वह इस घर को, इस शहर को और इन कड़वी यादों को हमेशा के लिए पीछे छोड़ देगी। वह लियो को लेकर एक नई जगह जाएगी, जहाँ कोई अतीत का साया न हो, जहाँ कोई झूठ न हो, और जहाँ एक मां अपने बच्चे को केवल उस प्यार की छांव में बड़ा कर सके जिसे न तो कोई धोखा छीन सकता है और न ही मौत मिटा सकती है।

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