Story

मासूम के बस्ते से निकली वह डरावनी तस्वीर जिसने माँ की रूह कंपा दी: “अभी पुलिस को फोन करो!” और खुल गया घर की दीवारों में छिपा सबसे भयानक राज़

शाम के करीब साढ़े पांच बज रहे थे। बाहर आसमान में स्याह बादल घिर आए थे और हल्की बारिश की बूंदें खिड़की के शीशों से टकरा रही थीं। मिरांडा हमेशा की तरह किचन में अपने सात साल के बेटे लियो के लिए सूप और सैंडविच तैयार कर रही थी। घर में चारों तरफ एक अजीब सी खामोशी फैली हुई थी—वही खामोशी जो पिछले तीन हफ्तों से इस मकान की हर दीवार, हर कोने में आहिस्ता-आहिस्ता घर करती जा रही थी।

लियो हमेशा से एक बेहद चंचल, हंसमुख और सवाल पूछने वाला बच्चा था। वह स्कूल से लौटते ही पूरे घर को अपनी आवाज़ से सिर पर उठा लेता था। कौन सा शिक्षक कैसा था, खेल के मैदान में उसने क्या नया देखा, उसके सहपाठी ने क्या शरारत की—वह हर छोटी-बड़ी बात अपनी माँ से बांटे बिना चैन से नहीं बैठता था। मगर पिछले कुछ दिनों से लियो पूरी तरह बदल चुका था। वह स्कूल से आता, चुपचाप अपना भारी बस्ता दालान के कोने में पटक देता और बिना किसी से नज़र मिलाए सीधे अपने कमरे में चला जाता। वह खिड़की के पास फर्श पर अपने घुटनों को सीने से चिपकाकर घंटों बैठा रहता। जब मिरांडा उससे पूछती कि क्या बात है, तो वह केवल अपनी पलकें झुका लेता और कहता, “कुछ नहीं माँ, बस थोड़ी थकान है।”

मिरांडा को पहले लगा कि शायद पहली कक्षा का नया सिलेबस उस पर भारी पड़ रहा है, या शायद स्कूल में किसी सहपाठी ने उसे कुछ कह दिया होगा। उसने स्कूल की टीचर मिस हेलेना से फोन पर बात भी की थी, लेकिन उन्होंने कहा कि लियो क्लास में चुपचाप बैठा रहता है, पढ़ाई में ध्यान देता है, बस किसी से बात नहीं करता और लंच के समय अकेले कोने में बैठता है। मिरांडा के मन में एक अनजाना डर धीरे-धीरे पैर पसार रहा था। एक माँ का दिल कभी गलत चेतावनी नहीं देता, और मिरांडा की अंतरात्मा चीख-चीख कर कह रही थी कि कुछ तो ऐसा है जो उसकी नज़र से पूरी तरह ओझल है।

उस शाम, जब लियो अपने कमरे में गुमसुम बैठा था, मिरांडा ने सोचा कि वह उसका स्कूल बैग चेक करेगी। शायद उसकी किसी नोटबुक में कोई नोट हो, शायद कोई असाइनमेंट अधूरा हो जिसके डर से बच्चा इतना सहमा हुआ है। उसने हॉलवे में रखे नीले बस्ते की चेन धीरे से खोली। बस्ते से पेंसिल बॉक्स, पानी की खाली बोतल और आधी खाई हुई रोटी का डिब्बा बाहर आया। किताबों को पलटते हुए मिरांडा की उंगलियां एक मुड़ी-तुड़ी सफेद ड्राइंग शीट से टकराईं। वह पन्ना काफी खुरदुरा हो चुका था, जैसे किसी ने डर के मारे उसे बार-बार मोड़ा और फिर सीधा किया हो।

मिरांडा ने बिना किसी खास उम्मीद के उस कागज़ को खोला। उसे लगा कि हमेशा की तरह पेड़ों, नीले आसमान या किसी कार्टून कैरेक्टर का मासूम रेखाचित्र होगा।

मगर जैसे ही कागज़ पूरी तरह खुला, मिरांडा के हाथ कांप गए। उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई और गले से एक तीखी, बेबस चीख निकल पड़ी। कमरे की हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी महसूस होने लगी।

उस पन्ने पर लाल और काले क्रेयॉन से एक बेहद खौफनाक तस्वीर उकेरी गई थी। तस्वीर में एक बहुत बड़ा, बेडौल और भयानक दिखने वाला चेहरा बना था, जिसकी आँखें बाहर को उबली हुई थीं और माथे पर गुस्से की गहरी लकीरें थीं। उसके चेहरे पर अजीब सी नुकीली दाढ़ी और तीखे बाल थे। लेकिन जो बात सबसे ज़्यादा दिल दहला देने वाली थी, वह था उस बड़े चेहरे के ठीक नीचे बना दूसरा चित्र—एक छोटा, रोता हुआ बच्चा, जिसकी छाती और शरीर पर लाल रंग के गहरे गोल निशान बने हुए थे। लाल रंग की स्याही कागज़ पर इस तरह फैली हुई थी जैसे किसी ज़ख्म से लगातार खून रिस रहा हो। छोटे बच्चे के हाथ बंधे हुए दिखाए गए थे और उसके पैरों के नीचे कटीले तारों या पिंजरे जैसी आकृतियां खींची गई थीं। उस भयानक चेहरे वाले साए का एक विशाल हाथ उस छोटे बच्चे की गर्दन की ओर बढ़ रहा था।

कागज़ के ऊपरी कोने पर पेंसिल से कांपते हुए अक्षरों में एक नाम लिखा था। वह नाम देखते ही मिरांडा के हाथ से वह कागज़ फर्श पर गिर पड़ा। उसका पूरा शरीर थर-थर कांपने लगा।

वह नाम था: “अंकल डेविड”।

डेविड कोई अजनबी नहीं था। वह मिरांडा के पति आर्थर का बेहद करीबी चचेरा भाई था। करीब एक महीने पहले जब आर्थर को एक ज़रूरी प्रोजेक्ट के सिलसिले में दूसरे शहर जाना पड़ा था, तो डेविड ने खुद आगे बढ़कर मदद की पेशकश की थी। डेविड एक शांत, सुलझा हुआ और प्रतिष्ठित व्यक्ति माना जाता था। वह अक्सर शाम को लियो को पार्क ले जाने या स्कूल से पिक करने में मिरांडा की मदद कर देता था ताकि मिरांडा अपने वर्क-फ्रॉम-होम के काम को समय पर पूरा कर सके। मिरांडा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस इंसान पर उन्होंने अपने परिवार के सदस्य की तरह भरोसा किया, उसके चेहरे के पीछे इतना भयानक भेड़िया छिपा हो सकता है।

मिरांडा तुरंत लड़खड़ाते कदमों से लियो के कमरे की तरफ दौड़ी। दरवाज़ा आधा खुला हुआ था। लियो कमरे के अंधेरे कोने में, हीटर के पास फर्श पर सिकुड़कर बैठा हुआ था, अपना सिर घुटनों में छुपाए हुए। वह धीरे-धीरे सिसक रहा था।

मिरांडा फर्श पर उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपने कांपते हाथों से लियो के चेहरे को ऊपर उठाया। बच्चे की मासूम आँखें आंसुओं से सूज चुकी थीं और उसका पूरा बदन पत्ती की तरह कांप रहा था।

“लियो… मेरे बच्चे, मेरी तरफ देखो,” मिरांडा की आवाज़ आंसुओं में डूब रही थी। उसने वह मुड़ा हुआ कागज़ लियो के सामने रखा। “यह… यह क्या है बेटा? मुझे सच बताओ, तुम्हें किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हारी माँ यहाँ है।”

तस्वीर को देखते ही लियो की आँखें खौफ से फैल गईं। उसने झटके से अपने हाथ पीछे खींच लिए और रोते हुए चिल्लाया, “नहीं माँ! इसे छुपा दो! अगर अंकल डेविड को पता चला कि मैंने यह बनाया है, तो वह मुझे उस अंधेरे तहखाने में बंद कर देंगे! उन्होंने कहा था कि अगर मैंने तुम्हें कुछ भी बताया, तो वह तुम्हें चोट पहुंचाएंगे!”

लियो के ये शब्द किसी जलते हुए खंजर की तरह मिरांडा के सीने में उतर गए। उसका बच्चा इतने हफ्तों से इस असहनीय यातना और डर को अकेले झेल रहा था, सिर्फ अपनी माँ को सुरक्षित रखने के लिए। मिरांडा का मातृत्व अंदर से दहल उठा। उसने लियो को अपनी बाहों में कसकर भींच लिया।

“लियो, मुझे दिखाओ… उन्होंने तुम्हारे साथ क्या किया?” मिरांडा ने रुंधे हुए गले से पूछा।

कांपते हुए हाथों से, सात साल के उस मासूम ने अपनी नीली टी-शर्ट धीरे-धीरे ऊपर उठाई।

जैसे ही मिरांडा की नज़र उसके सीने और पसलियों पर पड़ी, उसके मुंह से चीख निकल गई और उसने अपनी हथेलियों से अपना मुंह दबा लिया। लियो के कोमल शरीर पर सिगरेट के जले हुए गहरे काले और लाल गोल दाग थे—बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने उस ड्राइंग में लाल क्रेयॉन से बनाए थे। उसकी पीठ और कंधों पर उंगलियों के नीले पड़े दबाव के निशान थे।

मिरांडा के दिमाग में सब कुछ एक झटके में साफ हो गया। दो हफ्ते पहले जब उसने लियो के बदन पर एक छोटा सा लाल निशान देखा था, तो डेविड ने बहुत सहजता से हंसते हुए कहा था कि पार्क में खेलते वक्त लियो साइकिल से गिर गया था और झाड़ियों की सूखी टहनियां उसे चुभ गई थीं। मिरांडा ने उस समय भरोसा कर लिया था। उस भरोसे का पछतावा अब तेज़ाब बनकर उसकी रगों में दौड़ रहा था।

“जब भी आप किचन में खाना बना रही होती थीं या फोन पर बात कर रही होती थीं,” लियो ने हिचकियों के बीच धीरे-धीरे बोलना शुरू किया, “अंकल डेविड मुझे बेसमेंट में ले जाते थे। वह अपनी सिगरेट निकालते थे और कहते थे कि यह हमारा सीक्रेट गेम है। अगर मैं चिल्लाया या रोया, तो वह मुझे वहीं बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास एक बड़ा चाकू है और वह आपको भी मार देंगे अगर मैंने एक भी शब्द बोला…”

बच्चे की हर एक बात के साथ कमरे की हवा भारी होती जा रही थी। मिरांडा को महसूस हुआ कि कमजोरी या रोने का यह वक्त नहीं है। अगर वह टूट गई, तो उसका बच्चा कभी सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगा। उसके आंसुओं की जगह अब एक उग्र, बेकाबू गुस्से ने ले ली।

उसने बिना एक पल गंवाए अपना फोन उठाया और सीधे इमरजेंसी नंबर डायल किया।

फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से भारी आवाज़ आई, “इमरजेंसी हेल्पलाइन, आपकी क्या सहायता कर सकते हैं?”

“अभी पुलिस को भेजो! तुरंत!” मिरांडा लगभग चिल्लाई, उसकी आवाज़ में एक घायल शेरनी जैसी गर्जना थी। “मेरे घर पर तुरंत पुलिस और मेडिकल टीम भेजिए! मेरे बच्चे की जान को खतरा है… एक दरिंदा हमारे बीच छिपा हुआ है!”

उसने पुलिस को अपना पता दिया और स्थिति की गंभीरता बताई। पुलिस ऑपरेटर ने उसे शांत रहने और दरवाज़ा अंदर से बंद करके कमरे में ही रहने की सलाह दी।

लेकिन ठीक उसी समय, नीचे के मुख्य दरवाज़े का लॉक खुलने की आवाज़ आई।

‘क्लिक।’

मिरांडा का दिल जैसे धड़कना भूल गया। घर की चाबी सिर्फ तीन लोगों के पास थी—उसके पास, उसके पति के पास (जो शहर से बाहर थे), और डेविड के पास।

डेविड वापस आ गया था।

नीचे से भारी जूतों की आहट सुनाई दी। डेविड हमेशा की तरह सीटी बजाते हुए घर के अंदर दाखिल हुआ था। “मिरांडा? लियो? तुम लोग कहाँ हो? देखो मैं बाज़ार से आइसक्रीम लाया हूँ!” उसकी आवाज़ में वही बनावटी मिठास और सामान्यता थी, जो अब मिरांडा को किसी ज़हरीले सांप की फुफकार जैसी लग रही थी।

लियो ने डर के मारे मिरांडा का हाथ इतनी ज़ोर से पकड़ लिया कि उसके नाखून उसकी त्वचा में धंस गए। बच्चा दहशत से कांप रहा था, उसकी सांसें उखड़ रही थीं। “माँ… वह आ गया… वह मुझे मार डालेगा…”

“कोई तुम्हें हाथ नहीं लगाएगा लियो। जब तक तुम्हारी माँ ज़िंदा है, कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता,” मिरांडा ने फुसफुसाते हुए कहा। उसने लियो को अलमारी के पीछे छुपा दिया और धीरे से बेडरूम का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर लिया।

तभी सीढ़ियों पर भारी कदमों की आवाज़ तेज़ होने लगी। डेविड ऊपर आ रहा था।

“लियो? तुम अपने कमरे में हो क्या चैंपियन?” डेविड की आवाज़ अब बेडरूम के दरवाज़े के ठीक बाहर थी। उसने दरवाज़े का हैंडल घुमाया, लेकिन वह बंद था।

दरवाज़ा न खुलने पर बाहर एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। फिर एक भारी दस्तक हुई।

“मिरांडा? दरवाज़ा क्यों बंद है? क्या सब ठीक है?” डेविड के लहजे की मिठास धीरे-धीरे गायब हो रही थी और उसमें एक संदेह की खुरदुराहट आने लगी थी।

मिरांडा दरवाज़े के पीछे खड़ी थी। उसकी नज़र कमरे के कोने में रखे एक भारी पीतल के लैंप पर पड़ी। उसने बिना आवाज़ किए उस लैंप को अपने हाथों में उठा लिया। उसका पूरा ध्यान सिर्फ अपने बच्चे की सुरक्षा पर था।

“डेविड, तुम यहाँ से तुरंत चले जाओ,” मिरांडा ने दरवाज़े के पार से बेहद सख्त और स्थिर आवाज़ में कहा। “मुझे सब पता चल चुका है। लियो ने मुझे सब दिखा दिया है… वह ड्राइंग, वह ज़ख्म… सब कुछ।”

दरवाज़े के उस पार अचानक एक खौफनाक सन्नाटा पसर गया। सीटी की आवाज़, जो कुछ देर पहले तक आ रही थी, पूरी तरह बंद हो चुकी थी।

कुछ सेकंड बाद, डेविड की आवाज़ आई। लेकिन अब वह पारिवारिक रिश्तेदार वाली आवाज़ नहीं थी। वह एक ठंडी, क्रूर और डरावनी फुसफुसाहट में बदल चुकी थी। “मिरांडा… तुमने उस बच्चे के बकवास स्केच पर यकीन कर लिया? वह तो बस एक खेल था। दरवाज़ा खोलो, हम बैठकर बात करते हैं। तुम बात को बहुत बढ़ा रही हो।”

“मैंने पुलिस को बुला लिया है डेविड! वे किसी भी वक्त यहाँ पहुँचने वाले हैं!” मिरांडा ने चिल्लाकर कहा।

यह सुनते ही डेविड का संयम पूरी तरह टूट गया। उसने पूरी ताकत से दरवाज़े पर लात मारी।

‘धड़ाम!’

कमज़ोर लकड़ी का दरवाज़ा अपनी चौखट से हिल गया। लियो अलमारी के पीछे डर से चीख पड़ा।

“दरवाज़ा खोलो मिरांडा! अगर तुमने किसी को कुछ भी बताया तो तुम दोनों में से कोई ज़िंदा नहीं बचेगा!” डेविड पागलों की तरह दरवाज़े को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। दरवाज़े की लकड़ी में दरारें पड़ने लगी थीं। वह बार-बार अपने भारी शरीर से दरवाज़े पर वार कर रहा था।

मिरांडा जानती थी कि यह दरवाज़ा ज़्यादा देर तक नहीं टिकेगा। उसने लैंप को दोनों हाथों में कसकर पकड़ा और दरवाज़े के ठीक सामने अपनी मुद्रा बना ली। उसका डर अब पूरी तरह खत्म हो चुका था; उसकी जगह एक माँ के उग्र संकल्प ने ले ली थी। अगर उस राक्षस को लियो तक पहुँचना था, तो उसे पहले मिरांडा की लाश से होकर गुज़रना पड़ता।

‘तड़ाक!’

दरवाज़े का लॉक टूट गया और दरवाज़ा झटके से खुला। डेविड एक खूंखार जानवर की तरह अंदर घुसा। उसकी आँखें लाल थीं और चेहरे पर वह वहशियाना मुस्कान थी जो किसी शैतान की हो सकती है। उसके हाथ में एक भारी टूलबॉक्स का पाना (रेंच) था।

जैसे ही उसने लियो की तरफ कदम बढ़ाया, मिरांडा अपनी पूरी ताकत से उस पर झपट पड़ी। उसने वह भारी पीतल का लैंप पूरी शक्ति से डेविड के चेहरे पर दे मारा।

एक तीखी आवाज़ के साथ लैंप डेविड के माथे और कंधे से टकराया। डेविड दर्द से कराह उठा और लड़खड़ाकर पीछे की ओर गिरा। उसके माथे से खून की एक पतली धार बह निकली। लेकिन वह भारी शरीर का इंसान था; उसने संभलते हुए मिरांडा की कलाई पकड़ ली और उसे दीवार की तरफ धकेल दिया।

मिरांडा की पीठ ज़ोर से दीवार से टकराई और लैंप उसके हाथ से छूटकर गिर गया। डेविड ने अपनी उंगलियां मिरांडा के गले की तरफ बढ़ाईं। “तुम्हें चुप रहना चाहिए था मिरांडा… तुम्हें वह कागज़ कभी नहीं देखना चाहिए था!”

उसी क्षण, घर के बाहर तेज़ सायरन की आवाज़ गूंज उठी। लाल और नीली बत्तियों की तेज़ रोशनी खिड़की के शीशों से होती हुई बेडरूम की दीवारों पर नाचने लगी।

टायरों के घिसटने की तीखी आवाज़ आई, और नीचे के हॉलवे में कई भारी कदमों की धमक गूंज उठी।

“पुलिस! हथियार फेंक दो और हाथ ऊपर करो!” नीचे से कड़क आवाज़ें आईं।

सायरन की आवाज़ सुनते ही डेविड के चेहरे का रंग उड़ गया। उसकी आंखों में पहली बार वह वहशीपन डर में बदल गया। उसने मिरांडा को छोड़ा और खिड़की की तरफ भागने की कोशिश की ताकि पीछे के बगीचे से होकर फरार हो सके।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

चार हथियारबंद पुलिस अधिकारी सीढ़ियां चढ़ते हुए सीधे कमरे में दाखिल हुए। इससे पहले कि डेविड खिड़की का शीशा खोल पाता, दो अधिकारियों ने उसे दबोच लिया और फर्श पर पटक दिया। एक तेज़ झटके के साथ उसकी कलाई पर हथकड़ियां कस दी गईं।

डेविड फर्श पर पड़ा छटपटा रहा था, लेकिन कानून की गिरफ्त इतनी मज़बूत थी कि वह एक इंच भी नहीं हिल सका। अधिकारी उसे खींचते हुए सीढ़ियों से नीचे ले गए। उसकी गंदी, डरावनी मौजूदगी हमेशा के लिए उस घर से बाहर निकाल दी गई थी।

कमरे में अब सिर्फ पुलिस के कुछ नरम दिल अधिकारी और मेडिकल टीम के सदस्य बचे थे।

मिरांडा फर्श पर बैठ गई। उसने अलमारी के पीछे से लियो को बाहर निकाला और उसे अपने सीने से लगा लिया। दोनों फूट-फूट कर रो रहे थे, लेकिन अब वे डर के आंसू नहीं थे—वे उस भयानक साए से आज़ाद होने के आंसू थे।

पैरामेडिक्स ने लियो के ज़ख्मों का प्राथमिक उपचार किया और उसे धीरे-धीरे समझाया कि अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। महिला पुलिस अधिकारी ने फर्श पर पड़ी उस मुड़ी-तुड़ी ड्राइंग को सबूत के तौर पर अपने बैग में रखा। उसने मिरांडा के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “अगर आपने आज इस तस्वीर पर ध्यान न दिया होता और हिम्मत न दिखाई होती, तो हम सोच भी नहीं सकते कि इस मासूम के साथ क्या हो जाता। आपकी सतर्कता ने आज एक ज़िन्दगी बचा ली।”

कुछ घंटों बाद, मिरांडा के पति आर्थर भी बदहवास हालत में अस्पताल पहुँचे। जब उन्हें अपने भाई के इस भयानक चेहरे और लियो की आपबीती का पता चला, तो वह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। उन्हें इस बात का गहरा सदमा था कि जिस पर उन्होंने आंख मूंदकर भरोसा किया, वही उनके हंसते-खेलते संसार को तबाह करने पर तुला था।

पुलिस की बाद की जांच में यह खौफनाक खुलासा हुआ कि डेविड कोई साधारण इंसान नहीं था; वह एक बेहद विकृत और बीमार मानसिकता वाला अपराधी था, जो पहले भी दूसरे शहरों में ऐसे कई मामलों में संदिग्ध रह चुका था लेकिन अपनी रसूख और चालाकी के कारण बच निकलता था। लियो द्वारा बनाई गई वह एक ड्राइंग उसके खिलाफ सबसे पुख्ता और अकाट्य कानूनी सबूत बन गई। न्यायालय ने बिना किसी देरी के डेविड को कठोर कारावास की सज़ा सुनाई, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि वह कभी दोबारा किसी मासूम के बचपन को अपने अंधेरे साए से छू नहीं सकेगा।

उस भयानक रात के कई महीनों बाद, मिरांडा और आर्थर ने उस पुराने घर को हमेशा के लिए छोड़ दिया और शहर के एक शांत, खुले इलाके में एक नया आशियाना बनाया। नए घर की दीवारें खिड़कियों से आने वाली सुनहरी धूप से रोशन रहती थीं।

लियो ने थेरेपी और अपने माता-पिता के असीम प्यार के सहारे धीरे-धीरे सामान्य जीवन जीना शुरू कर दिया था। उसके चेहरे पर वह खोई हुई मुस्कान लौट आई थी। वह अब फिर से कागज़ों पर चित्र बनाता था, लेकिन अब उन चित्रों में कोई खौफनाक चेहरे या लाल ज़ख्म नहीं होते थे। अब उसके कागज़ों पर बड़े-बड़े हरे पेड़ होते थे, खिली हुई धूप होती थी, ऊंचे पहाड़ होते थे, और उन सबके बीच में एक छोटा सा सुरक्षित घर होता था—जिसके दरवाज़े पर मुस्कुराती हुई एक माँ खड़ी होती थी, जिसने अपनी जान की बाज़ी लगाकर अपने बच्चे के बचपन को नरक बनने से बचा लिया था।

-

You Might Also Enjoy