अगर शरीर में कै.ं.सर कोशिकाएँ बढ़ रही हैं, तो ये 5 हिस्से असामान्य रूप से काले पड़ सकते हैं
हमारा शरीर अक्सर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत पहले ही देना शुरू कर देता है। कई बार ये संकेत…
महिलाओं की ठुड्डी पर बाल आना अंदरूनी स्वास्थ्य का एक स्पष्ट संकेत है।
अक्सर कई महिलाओं को अपनी ठुड्डी (चिन), जबड़े की रेखा या ऊपरी होंठों के आसपास कुछ कड़े और काले बाल उगते हुए दिखाई देते हैं। पहली बार जब ऐसा होता है, तो कई महिलाएं इसे केवल एक कॉस्मेटिक समस्या मानकर ट्वीजिंग, थ्रेडिंग या वैक्सिंग से हटाने की कोशिश करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चेहरे के इस हिस्से पर बालों का आना केवल बाहरी त्वचा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य और हार्मोनल बदलावों का भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है?
चिकित्सा विज्ञान में महिलाओं के चेहरे और शरीर पर सामान्य से अधिक या पुरुषों की तरह कड़े बाल आने की स्थिति को ‘हिर्सुटिज़्म’ (Hirsutism) कहा जाता है। यह कोई गंभीर डरने वाली बात नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक संदेश है कि हमारे अंदरूनी संतुलन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इसके मुख्य कारण क्या हैं और इसे संतुलित कैसे रखा जा सकता है।

हमारे शरीर में कई तरह के हार्मोन एक नाजुक संतुलन में काम करते हैं। जब इस संतुलन में थोड़ा भी बदलाव आता है, तो इसके लक्षण त्वचा और बालों पर दिखाई देने लगते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
महिलाओं के शरीर में मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के साथ-साथ बहुत कम मात्रा में ‘एंड्रोजेन’ (जैसे टेस्टोस्टेरोन) नामक पुरुष हार्मोन भी मौजूद होते हैं। जब किसी कारण से शरीर में एंड्रोजेन का स्तर थोड़ा बढ़ जाता है या बालों के रोमछिद्र (हेयर फॉलिकल्स) इसके प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, तो ठुड्डी और चेहरे पर मोटे बाल उगने लगते हैं।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन का एक बेहद आम कारण है। इसमें अनियमित मासिक धर्म, वजन का तेजी से बढ़ना, मुंहासे और चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या देखने को मिल सकती है।
उम्र के विभिन्न चरणों, जैसे रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर स्वाभाविक रूप से घटने लगता है। ऐसे समय में एंड्रोजेन का अनुपात अपेक्षाकृत बढ़ जाता है, जिससे मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में ठुड्डी पर बाल दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है।
लगातार मानसिक तनाव या नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है। कोर्टिसोल का उच्च स्तर अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) के कार्य को प्रभावित करता है, जिससे समग्र हार्मोन संतुलन बिगड़ सकता है।

यदि आपके परिवार में मां, नानी या बहनों को चेहरे पर बालों की ऐसी प्रवृत्ति रही है, तो आनुवंशिक रूप से आपके शरीर में भी यह लक्षण प्रकट होने की संभावना अधिक होती है।
शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य को सही दिशा देकर और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर हार्मोनल संतुलन को काफी हद तक सुधारा जा सकता है:
सप्ताह में कम से कम 4 से 5 दिन 30 मिनट का मध्यम व्यायाम जैसे तेज चलना, योग, तैराकी या एरोबिक्स करें। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है और वजन नियंत्रित रहता है, जो हार्मोन संतुलन के लिए अनिवार्य है।
रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और शांत नींद लें। ध्यान (Meditation) और प्राणायाम का अभ्यास करें ताकि कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रहे।
बालों को हटाते समय त्वचा की सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
यदि आप नोटिस करती हैं कि:
तो ऐसी स्थिति में किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से मिलकर बेसिक हार्मोन प्रोफाइल की जांच करवाएं। सही समय पर सही मार्गदर्शन से स्वास्थ्य हमेशा बेहतर बना रहता है।
हमारा शरीर अक्सर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत पहले ही देना शुरू कर देता है। कई बार ये संकेत…
एक 12 वर्षीय लड़के को कई दिनों से बुखार, कमजोरी और शरीर दर्द की शिकायत थी। परिवार को लगा कि…
एक 33 वर्षीय व्यक्ति को तब बड़ा झटका लगा जब लगातार थकान, भूख कम लगना और पेट में हल्की असुविधा…
कभी-कभी घर के किसी पुराने कोने में रखा हुआ सामान ऐसी कहानी छिपाए बैठा होता है जिसकी किसी ने कल्पना…
पुरानी तस्वीरों में एक अजीब जादू होता है। वे हमें बिना किसी टाइम मशीन के सीधे अतीत में ले जाती…
बहुत से लोग अस्पताल के नवजात शिशु वार्ड में कभी-कभी एक बैंगनी तितली का चिन्ह या स्टिकर देखते हैं, लेकिन…