सोते समय मुंह से लार गिरना (Drooling While Sleeping): जानिए इसका वैज्ञानिक कारण, फायदे और रोकने के आसान उपाय
सोते समय लार बहना शरीर के गहरे आराम का संकेत है, जानिए पूरी सच्चाई।
जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो कई बार सुबह उठने पर तकिया गीला मिलता है या मुंह के कोने से लार बहती हुई महसूस होती है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘सियालोरिया’ (Sialorrhea) कहा जाता है। अक्सर लोग इसे शर्मिंदगी भरा अनुभव मानते हैं या यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि कहीं उनके मस्तिष्क या शरीर में कोई बड़ी कमजोरी तो नहीं आ गई है। हालांकि, अधिकांश मामलों में सोते समय लार गिरना किसी बीमारी का लक्षण नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपका मस्तिष्क और पूरा शरीर बेहद गहरी, तनावमुक्त और आरामदायक नींद की अवस्था में पहुंच चुका है।

सोते समय जब शरीर पूरी तरह से शिथिल (relax) हो जाता है, विशेष रूप से आरईएम (Rapid Eye Movement) स्लीप चरण में, तो हमारे चेहरे और मुंह की मांसपेशियां पूरी तरह ढीली पड़ जाती हैं। जागते समय हम अनजाने में ही अपनी अतिरिक्त लार को निगलते रहते हैं, लेकिन गहरी नींद में निगलने की यह स्वाभाविक क्रिया धीमी हो जाती है। जब मांसपेशियां आराम की मुद्रा में होती हैं और मुंह हल्का सा खुल जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण लार बाहर बहने लगती है। इसलिए, अधिकांश परिस्थितियों में यह आपके तंत्रिका तंत्र के शांत होने और अच्छी गुणवत्ता वाली गहरी नींद मिलने का एक बहुत ही स्वाभाविक और सकारात्मक संकेत माना जाता है।
सोते समय लार क्यों गिरती है? मुख्य कारण और शरीर की कार्यप्रणाली
लार बहने के पीछे कई सामान्य और जैविक कारण होते हैं। मानव शरीर में प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ लीटर लार का निर्माण होता है, जो हमारे मुंह को नम रखने, पाचन को दुरुस्त करने और दांतों को बैक्टीरिया से बचाने के लिए अनिवार्य है। आइए समझते हैं कि नींद के दौरान लार बाहर आने के मुख्य कारक क्या हैं:
- सोने की गलत मुद्रा (Sleeping Position): यदि आप करवट लेकर या पेट के बल सोते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण मुंह में बनने वाली लार स्वाभाविक रूप से बाहर आने लगती है। पीठ के बल सीधे सोने वालों में लार मुंह के भीतर ही रहती है और आसानी से गले के रास्ते नीचे चली जाती है, जबकि करवट लेकर सोने पर तकिए पर लार बहना बहुत आम बात है।
- अत्यधिक गहरी नींद (Deep Sleep / REM Sleep): जब आप दिनभर की भागदौड़ और मानसिक थकान के बाद गहरी नींद में प्रवेश करते हैं, तो आपका मस्तिष्क शरीर को पूरी तरह आराम की स्थिति में भेज देता है। इस समय चेहरे, होठों और जबड़े की मांसपेशियां इतनी शिथिल हो जाती हैं कि मुंह खुद-ब-खुद खुल जाता है। यह गहरी नींद का एक प्रमाण है।
- नाक बंद होना और मुंह से सांस लेना: यदि किसी व्यक्ति को मौसमी एलर्जी, सर्दी-जुकाम, साइनस संक्रमण या नाक की हड्डी टेढ़ी होने (DNS) की समस्या है, तो वह नींद में नाक के बजाय मुंह से सांस लेने लगता है। सांस लेने के लिए मुंह खुला रहने से लार रुक नहीं पाती और बह जाती है।
- एसिड रिफ्लक्स या जीईआरडी (GERD): पेट में अत्यधिक एसिड बनने पर शरीर स्वाभाविक रूप से एसिड को बेअसर करने के लिए अधिक लार का उत्पादन करता है। जब यह एसिड रात में गले तक आता है, तो लार ग्रंथियां तेजी से सक्रिय हो जाती हैं, जिससे मुंह में अत्यधिक तरल जमा होने लगता है।
- दवाओं का प्रभाव: कुछ विशेष प्रकार की दवाएं, जैसे नींद की गोलियां, तनाव कम करने वाली दवाएं या कुछ अवसादरोधी दवाएं, लार ग्रंथियों को उत्तेजित कर सकती हैं, जिससे लार का उत्पादन सामान्य से अधिक हो जाता है।

क्या सोते समय लार गिरना फायदेमंद भी है?
कई लोग इसे केवल एक असुविधाजनक आदत के रूप में देखते हैं, परंतु शरीर विज्ञान के दृष्टिकोण से इसके कई सकारात्मक पहलू भी हैं:
- मानसिक तनाव से मुक्ति: जब व्यक्ति मानसिक रूप से शांत होता है और किसी गहरी चिंता में नहीं होता, तभी मस्तिष्क आरईएम चरण की नींद में निर्बाध रूप से जा पाता है। इस चरण में लार बहना यह दर्शाता है कि आपका तंत्रिका तंत्र अत्यधिक दबाव से मुक्त हो रहा है।
- पाचन तंत्र का संतुलन: पर्याप्त लार का निर्माण यह प्रमाणित करता है कि आपकी लार ग्रंथियां स्वस्थ रूप से काम कर रही हैं। लार में एंजाइम होते हैं जो भोजन को पचाने और मुंह की अंदरूनी परत को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
- मौखिक स्वास्थ्य की सुरक्षा: लार प्राकृतिक रूप से दांतों और मसूड़ों को सूखा होने से बचाती है और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित रखने में सहायक होती है।
सोते समय लार बहने से कैसे रोकें? सरल और सुरक्षित जीवनशैली उपाय
यदि आप इस आदत को कम करना चाहते हैं या हर सुबह तकिया गीला होने से असहज महसूस करते हैं, तो अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ सरल और व्यावहारिक बदलाव ला सकते हैं:
- पीठ के बल सोने का अभ्यास करें: अपनी सोने की मुद्रा बदलें। पीठ के बल (सुपाइन पोजीशन) सोने से गुरुत्वाकर्षण लार को मुंह से बाहर बहने से रोकता है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से निगल ली जाती है।
- नाक का मार्ग साफ रखें: सोने से पहले यदि नाक बंद महसूस हो, तो गर्म पानी की भाप लें या सेलाइन नेजल स्प्रे का उपयोग करें। जब नाक से सांस लेना आसान हो जाता है, तो मुंह बंद रहता है और लार बहने की संभावना काफी घट जाती है।
- सिर को थोड़ा ऊंचा रखें: सोते समय एक ऐसा तकिया चुनें जो आपके सिर और गर्दन को हल्का सा ऊपर उठाए रखे। सिर ऊंचा रहने से लार गले की तरफ नहीं रुकती और न ही आसानी से बाहर छलकती है।
- सोने से ठीक पहले भारी भोजन से बचें: रात को सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले हल्का और सुपाच्य भोजन करें। अत्यधिक मसालेदार, तैलीय या खट्टे खाद्य पदार्थों से बचें ताकि पेट में एसिड न बने और लार ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा सक्रिय न हों।
- दिनभर भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी होने पर मुंह सूखता है और प्रतिक्रिया स्वरूप शरीर कभी-कभी अचानक अधिक गाढ़ी लार बनाने लगता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से लार का प्रवाह संतुलित रहता है।
- हल्का गुनगुना पानी और शहद: सोने से पहले एक कप गुनगुने पानी में थोड़ी सी दालचीनी या एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से श्वसन मार्ग साफ रहता है और मुंह का वातावरण शांत बना रहता है।
कब किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है?
यद्यपि सोते समय लार गिरना अधिकांश मामलों में पूरी तरह सामान्य है, लेकिन यदि इसके साथ कुछ अन्य असहज लक्षण भी दिखाई दें, तो एक बार योग्य चिकित्सक या ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवा लेनी चाहिए:
- यदि लार बहने के साथ-साथ रात में तेज खर्राटे आते हों और अचानक सांस रुकने का अहसास होता हो (जो स्लीप एप्निया का लक्षण हो सकता है)।
- यदि दिन में भी जागते समय मुंह से लार को नियंत्रित करना कठिन हो रहा हो।
- यदि निगलने या बोलने में लगातार कोई रुकावट महसूस हो रही हो।
- यदि गले में बार-बार जलन, भारीपन या खट्टा पानी आने की समस्या बनी रहती हो।
संक्षेप में कहें तो, सोते समय मुंह से लार गिरना इस बात का सामान्य और सुरक्षित संकेत है कि आपका मस्तिष्क दिनभर के तनाव को भुलाकर विश्राम की गहरी अवस्था में लीन है। अपनी सोने की मुद्रा को सुधारकर और नाक की स्वच्छता का ध्यान रखकर आप इस स्थिति को बहुत आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं।