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पार्टी की वो आख़िरी रात, झील की गहराई में छिपा काला राज़: जब 36 घंटे की तलाश के बाद दलदल से निकली वो कार, तो दहल उठे दो हंसते-खेलते परिवारों के दिल!

ब्राज़ील के मिनस गेराइस राज्य का उबेरलैंडिया शहर उस रविवार की सुबह एक अजीब सी खामोशी में लिपटा हुआ था। 14 जून की वह सुबह आम दिनों की तरह ही हल्की ठंडी और धूप की पहली किरणों से नहाई हुई थी, लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि उसी शहर के बाहरी इलाके में एक ऐसी अनकही त्रासदी जन्म ले चुकी थी जो आने वाले कई दिनों तक पूरे देश की नसों में सिहरन दौड़ाने वाली थी। 26 साल की इंग्रिड गैब्रिएला बेज़ेरा न्यून्स और 23 साल का मारियो बतिस्ता रियोस—एक ऐसा युवा जोड़ा जिसके पास जीने के लिए अनगिनत सपने थे, जिनकी आँखों में भविष्य की उम्मीदें तैर रही थीं, और जिनके चेहरे पर हर पल खिली रहने वाली मुस्कान उनके हर जानने वाले के दिल को छू लेती थी। इंग्रिड सिर्फ एक युवती ही नहीं थी, वह एक आठ साल की मासूम बच्ची की माँ भी थी। उसकी पूरी कायनात, उसका हर संघर्ष और उसकी हर प्रार्थना उसकी उसी नन्ही बेटी के इर्द-गिर्द घूमती थी। जब भी वह काम से लौटती, अपनी बेटी को गले लगाकर दिनभर की थकान भूल जाती थी। मारियो भी स्वभाव से मिलनसार, ऊर्जावान और जीवन को पूरी शिद्दत से जीने वाला नौजवान था। उस वीकेंड दोनों ने अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताने की योजना बनाई थी। चाकरास वालपराइसो का वह फार्महाउस मौज-मस्ती, संगीत और हंसी-ठहाकों से भरा हुआ था। शनिवार की पूरी रात दोस्तों के साथ नाचना, पुरानी यादें ताजा करना और रविवार की भोर तक गपशप करना—सब कुछ किसी खूबसूरत सपने जैसा चल रहा था। किसी को क्या पता था कि वह खिलखिलाहट, वह जिंदादिली उस जोड़े की आखिरी सांसों की गवाह बनने जा रही थी।

रविवार की सुबह जब घड़ी ने 8:30 बजाए, तो फार्महाउस की चहल-पहल धीमी पड़ने लगी थी। कई मेहमान सोने चले गए थे, कुछ अपने घरों के लिए रवाना हो रहे थे। इंग्रिड और मारियो ने भी विदा लेने का फैसला किया। मारियो ने अपनी काली वोक्सवैगन गोल्फ (Volkswagen Golf) की चाबी घुमाई। कार का इंजन हल्की सी गड़गड़ाहट के साथ चालू हुआ। दोस्तों ने हाथ हिलाकर उन्हें अलविदा कहा। इंग्रिड ने कार की खिड़की से बाहर झांकते हुए मुस्कुराकर हाथ हिलाया—वही खूबसूरत, सुकून भरी मुस्कान जो अब हमेशा के लिए एक धुंधली तस्वीर बनकर रह जाने वाली थी। काली गोल्फ कार फार्महाउस के कच्चे रास्ते से मुड़कर मुख्य सड़क की ओर बढ़ी और धूल के एक छोटे से गुबार में ओझल हो गई। पार्टी में मौजूद आखिरी शख्स, जिसने उन्हें जिंदा देखा था, उसने भी यही सोचा कि दोनों दोपहर तक अपने बिस्तर पर आराम से सो रहे होंगे।

लेकिन समय का पहिया जैसे-जैसे आगे बढ़ा, दोपहर हुई, सूरज ढलने लगा, और उबेरलैंडिया की सड़कों पर शाम के साए लंबे होने लगे। इंग्रिड की माँ घर पर अपनी नातिन के साथ बार-बार घड़ी देख रही थी। आठ साल की बच्ची बार-बार खिड़की की ओर दौड़ती, हर गुजरती गाड़ी की आवाज़ पर यह सोचकर चौंकती कि शायद माँ आ गई। दोपहर दो बजे तक जब इंग्रिड का कोई फोन नहीं आया, तो परिवार के मन में पहली बार चिंता की हल्की सी लकीर खिंची। इंग्रिड कभी ऐसी नहीं थी जो बिना बताए गायब हो जाए। वह जहाँ भी जाती, दिन में कम से कम चार बार अपनी बेटी की खैरियत पूछने के लिए फोन जरूर करती थी। दोपहर के तीन बजे इंग्रिड के फोन पर पहली घंटी बजाई गई। कोई जवाब नहीं मिला। कुछ देर बाद दोबारा कोशिश की गई, लेकिन इस बार फोन सीधे वॉयस मेल पर चला गया। अब परिवार ने मारियो का नंबर डायल किया। मारियो का फोन भी आउट ऑफ कवरेज या स्विच ऑफ बता रहा था।

शाम के पांच बजते-बजते यह चिंता एक भयानक घबराहट में बदलने लगी। परिजनों ने उन दोस्तों को फोन लगाना शुरू किया जो पार्टी में मौजूद थे। जब दोस्तों ने पुष्टि की कि दोनों सुबह साढ़े आठ बजे ही अपनी काली गोल्फ कार से घर के लिए निकल चुके थे, तो परिवार के पैरों तले से जमीन खिसक गई। फार्महाउस से शहर की दूरी मुश्किल से पैंतालीस मिनट से एक घंटे की थी। अगर वे सुबह निकले थे, तो वे गए कहाँ? क्या कार कहीं खराब हो गई थी? क्या कोई लूटपाट की घटना हो गई थी? या फिर उनका कोई छोटा-मोटा एक्सीडेंट हुआ था और वे किसी अनजान अस्पताल में बेसुध पड़े थे?

रविवार की पूरी रात एक भयानक दुःस्वप्न की तरह बीती। रिश्तेदार, करीबी दोस्त और परिवार के लोग उबेरलैंडिया के हर उस सरकारी और निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की खाक छानते रहे जहाँ किसी अज्ञात मरीज को भर्ती कराया जा सकता था। शहर के हर थाने में जाकर उन्होंने अपनी लापता बेटी और दामाद की तस्वीरें दिखाईं। हर जगह से बस एक ही निराशाजनक जवाब मिला—”हमारे पास इस हुलिए का कोई व्यक्ति नहीं आया है।” रात भर इंग्रिड की नन्ही बेटी रोते-रोते अपनी नानी की गोद में सो गई, इस मासूम उम्मीद के साथ कि सुबह जब उसकी आँखें खुलेंगी तो उसकी माँ उसके सिर पर हाथ फेर रही होगी। लेकिन सोमवार की सुबह अपने साथ राहत की कोई किरण लेकर नहीं आई, बल्कि एक ऐसा सन्नाटा लेकर आई जो अंदर तक झकझोर रहा था।

सोमवार, 15 जून की सुबह परिजनों और दोस्तों ने तय किया कि वे हाथ पर हाथ धरे पुलिस के भरोसे नहीं बैठ सकते। उन्होंने फार्महाउस से शहर को जोड़ने वाले पूरे रास्ते को खुद छानने का फैसला किया। दर्जनों गाड़ियां सड़कों पर उतर आईं। वे हर उस कच्चे रास्ते, हर उस मोड़ पर रुकते जहाँ किसी गाड़ी के फिसलने की ज़रा सी भी गुंजाइश हो सकती थी। दोपहर ढलते-ढलते कुछ रिश्तेदार एक बड़े जलाशय (रिजर्वॉयर) के किनारे बने घुमावदार रास्ते पर पहुंचे। यह इलाका सुनसान था, जहाँ सड़क के एक तरफ घनी झाड़ियां और दूसरी तरफ गहरा, मटमैला पानी फैला हुआ था।

अचानक एक दोस्त की नज़र सड़क के किनारे सूखी मिट्टी पर पड़ी। वहां गाड़ी के टायरों के ताज़ा घिसटने के निशान थे—स्किड मार्क्स जो यह चीख-चीख कर बयां कर रहे थे कि किसी गाड़ी ने अचानक बेहद तेज़ ब्रेक लगाने की कोशिश की थी। जब वे झाड़ियों की तरफ बढ़े, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। सूखी झाड़ियां बेरहमी से टूटी हुई थीं, मानो कोई भारी चीज़ उनसे टकराकर आगे गिरी हो। और फिर, झाड़ियों के बीच जमीन पर उन्हें कार का टूटा हुआ बम्पर और एक नंबर प्लेट बिखरी हुई मिली। नंबर प्लेट वही थी—काली वोक्सवैगन गोल्फ की! यह वह लम्हा था जब परिवार के लोगों की सांसें हलक में अटक गईं। उनके सबसे बुरे अंदेशे ने एक भयानक हकीकत का रूप ले लिया था। टायरों के निशान सीधे पानी की सतह की ओर जा रहे थे और फिर किनारे पर पहुंचकर गायब हो गए थे। सामने सिर्फ शांत, गहरा और गंदा पानी था।

तुरंत पुलिस और दमकल विभाग (फायर डिपार्टमेंट) की गोताखोर टीम को वायरलेस पर सूचना दी गई। सोमवार की शाम होते-होते उस वीरान जलाशय का किनारा पुलिस की नीली-लाल बत्तियों, सायरन की चीखों और रोते-बिलखते परिजनों से भर गया। मिनस गेराइस की सिविल पुलिस और विशेष गोताखोर (डाइवर्स) मौके पर पहुंचे। शाम के धुंधलके में जब गोताखोरों ने अपनी भारी ऑक्सीजन किट और टॉर्च के साथ उस ठंडे, मटमैले पानी में छलांग लगाई, तो किनारे पर खड़े हर शख्स का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पानी इतना गंदा और मटमैला था कि पानी के भीतर दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य के करीब थी। गोताखोरों को हाथ बढ़ाकर केवल छूकर अंदाज़ा लगाना पड़ रहा था।

पानी के भीतर लगभग एक घंटे की कड़ी और खतरनाक मशक्कत के बाद, किनारे से करीब 12 मीटर दूर और सतह से लगभग तीन मीटर की गहराई में, गोताखोर के हाथ धातु की एक ठंडी चादर से टकराए। वह वही काली वोक्सवैगन गोल्फ थी। गाड़ी पूरी तरह उल्टी पड़ी हुई थी और जलाशय की गाद (कीचड़) में आधी धंसी हुई थी। गोताखोरों ने जब टॉर्च की रोशनी कार की टूटी और कीचड़ से सनी खिड़कियों पर डाली, तो पानी के भीतर का वह भयावह दृश्य देखकर अनुभवी गोताखोरों के भी दिल दहल गए। कार के अंदर दो जिस्म शांत, बेहरकत तैर रहे थे। इंग्रिड और मारियो उसी ठंडी धातु की जेल में बंद थे। मौत ने उन्हें बाहर निकलने का एक भी मौका नहीं दिया था।

पानी के तेज दबाव और भारी गाद की वजह से उस रात गाड़ी को बाहर निकालना नामुमकिन साबित हुआ। क्रेन और भारी रस्सियों की व्यवस्था करने में समय लगा और रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ घंटों के लिए रोकना पड़ा। किनारे पर खड़े परिजनों के लिए वह रात कयामत की रात जैसी थी। उनकी बेटी, उनका बेटा उस ठंडे पानी के नीचे बिना सांस लिए डूबा पड़ा था और वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे।

मंगलवार की सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही भारी मशीनों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू हुआ। लोहे की मोटी रस्सियों को गोताखोरों ने पानी के भीतर जाकर कार के पिछले और अगले एक्सल से बांधा। क्रेन की भारी घड़घड़ाहट के साथ जब वह काली वोक्सवैगन गोल्फ पानी की सतह को चीरते हुए धीरे-धीरे बाहर निकली, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखें छलक पड़ीं। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, उसकी छत पिचक गई थी और शीशे चकनाचूर थे। पानी के फव्वारे कार के दरवाजों से बह रहे थे। जब अधिकारियों ने कार के दरवाजे खोले और दोनों शवों को बाहर निकाला, तो किनारे पर चीख-पुकार मच गई। इंग्रिड की माँ छाती पीटकर रोने लगी, “मेरी बच्ची… मेरी नन्हीं गुड़िया को मैं क्या जवाब दूंगी? भगवान, तूने यह क्या कर दिया!”

जांच अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम ने तुरंत घटनास्थल और कार का मुआयना करना शुरू किया। उस कार के भीतर जो प्राथमिक सबूत मिले, वे किसी उलझी हुई पहेली की तरह थे। गाड़ी का गियर बॉक्स चौथे गियर (4th gear) में फंसा हुआ था, जिससे यह अंदेशा लगाया गया कि जब हादसा हुआ, तब गाड़ी बहुत तेज़ रफ़्तार में दौड़ रही थी। इसके अलावा कार के अंदर एक कूलर बॉक्स भी बरामद हुआ जिसमें कुछ मादक पेय (अल्कोहल) की बोतलें रखी हुई थीं। हालांकि, सिविल पुलिस के अधिकारियों ने साफ किया कि जब तक फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह सामने नहीं आ जाती, तब तक यह कहना जल्दबाजी और गलत होगा कि हादसे की मुख्य वजह शराब थी या नहीं।

पुलिस के सामने कई अनसुलझे सवाल मुंह बाए खड़े थे। सड़क सूखी थी, सुबह साढ़े आठ बजे रोशनी भी पर्याप्त थी, फिर ऐसा क्या हुआ कि गाड़ी ने उस मोड़ पर अचानक संतुलन खो दिया? क्या अचानक सामने कोई जानवर आ गया था? क्या गाड़ी का कोई टायर अचानक फट गया था? या फिर रातभर जागने के बाद सुबह की उस ड्राइविंग में मारियो की आँख एक सेकंड के लिए झपक गई थी? वह एक सेकंड की झपकी, वह एक सेकंड की चूक, और ज़िंदगी हमेशा के लिए पानी की अथाह गहराइयों में समा गई।

इस दिल दहला देने वाले हादसे की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों में फैली, पूरे शहर में मातम छा गया। जिसने भी उस खिलखिलाते जोड़े की तस्वीर देखी, उसका कलेजा कांप गया। सबसे बड़ा दर्द उस आठ साल की मासूम बच्ची के लिए था, जिसे अब तक यह भी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि उसकी दुनिया हमेशा के लिए उजड़ चुकी है। वह अभी भी अपनी माँ के पसंदीदा खिलौने और कपड़ों को सीने से लगाकर उस दरवाजे को ताक रही थी जहाँ से उसकी माँ कभी वापस नहीं आने वाली थी।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कानूनी औपचारिकताओं और पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शवों को उनके गमगीन परिवारों को सौंप दिया गया, जिसके बाद नम आँखों और भारी मन से उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम विदाई के उस पल में जब इंग्रिड और मारियो को आखिरी बार देखा गया, तो श्मशान में मौजूद हर अजनबी की आँख से भी आंसू बह निकले।

मिनस गेराइस की सिविल पुलिस इस मामले की हर कोण से जांच कर रही है ताकि उस मनहूस सुबह की आखिरी कड़ियों को जोड़ा जा सके। लेकिन कागजी फाइलों, तकनीकी रिपोर्टों और बयानों से परे, दोनों परिवारों के सीने में जो खालीपन छूट गया है, उसे दुनिया की कोई जांच, कोई दलील कभी नहीं भर पाएगी। वह शांत जलाशय आज भी उसी तरह अपनी जगह पर मौजूद है, लेकिन वह अपने सीने में एक ऐसी खौफनाक सुबह की याद दबाए बैठा है जिसने दो ज़िंदगियों के सपनों को हमेशा-हमेशा के लिए पानी की गहराई में दफन कर दिया।

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