तली हुई मैकेरल मछली खाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी: डॉक्टरों ने बताया अप्रत्याशित कारण और जरूरी सावधानियां
मछली खाने के बाद अचानक असहजता का असली कारण और सुरक्षा टिप्स।
समुद्री भोजन (सीफूड) पोषक तत्वों, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होने के कारण दुनिया भर में सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। मैकेरल (बांगड़ा मछली) भी कई देशों में बहुत चाव से खाई जाती है। लेकिन हाल ही में एक मामला सामने आया जहां एक महिला को घर पर तली हुई मैकेरल मछली खाने के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी और तेज बेचैनी के चलते अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (ER) ले जाना पड़ा।
सीधे और सटीक शब्दों में कहें तो इसका कारण मछली का खराब होना या एलर्जी नहीं था, बल्कि ‘स्काम्ब्रॉइड विषाक्तता’ (Scombroid Poisoning या हिस्टामाइन टॉक्सिसिटी) थी। जब मैकेरल या टूना जैसी मछलियों को पकड़ने के तुरंत बाद उचित ठंडे तापमान (कोल्ड स्टोरेज) में नहीं रखा जाता, तो उनमें प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले बैक्टीरिया हिस्टिडीन नामक अमीनो एसिड को अत्यधिक मात्रा में ‘हिस्टामाइन’ में बदल देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मछली को तेज आंच पर तलने, उबालने या पकाने के बाद भी यह हिस्टामाइन नष्ट नहीं होता। भोजन के साथ अत्यधिक हिस्टामाइन शरीर में प्रवेश करते ही तेज एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे अचानक आपातकालीन स्थिति बन जाती है।

स्काम्ब्रॉइड टॉक्सिसिटी वास्तव में क्या है?
स्काम्ब्रॉइड विषाक्तता समुद्री खाद्य पदार्थों से जुड़ी सबसे आम लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।
मैकेरल, टूना, बोनिटो और सार्डिन जैसी मछलियों के गहरे लाल और तैलीय मांस में हिस्टिडीन प्रचुर मात्रा में होता है। यदि मछली को पकड़ने के बाद कुछ घंटों के लिए भी सामान्य या गर्म तापमान पर छोड़ दिया जाए, तो सतह पर मौजूद प्राकृतिक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। ये बैक्टीरिया हिस्टिडीन को हिस्टामाइन में बदल देते हैं।
जब कोई व्यक्ति इस मछली का सेवन करता है, तो शरीर को लगता है कि उस पर किसी एलर्जेन का गंभीर हमला हुआ है। चूंकि हिस्टामाइन गर्मी के प्रति प्रतिरोधी (Heat-stable) होता है, इसलिए चाहे मछली को कितना भी डीप-फ्राई क्यों न किया जाए, उसका असर कम नहीं होता।
शरीर पर तुरंत दिखने वाले प्रमुख लक्षण
भोजन करने के 10 मिनट से लेकर 1 घंटे के भीतर शरीर में इसके लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं:
- चेहरे और त्वचा पर प्रतिक्रिया: चेहरा, गर्दन और छाती का ऊपरी हिस्सा अचानक लाल पड़ जाना, तेज गर्मी लगना और शरीर पर खुजली वाले चकत्ते उभरना।
- मुंह और गले में अहसास: खाते समय या तुरंत बाद जीभ पर काली मिर्च जैसा तीखापन, धातु जैसा स्वाद या गले में अजीब झनझनाहट महसूस होना।
- श्वसन संबंधी परेशानी: ब्रोन्कोस्पाज्म यानी सांस की नलियों का सिकुड़ना, जिससे सांस फूलना या घरघराहट होना।
- पाचन तंत्र में असहजता: पेट में तेज मरोड़, मतली, उल्टी या दस्त की समस्या।
- सिरदर्द और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव: सिर में भारीपन, चक्कर आना और अचानक ब्लड प्रेशर कम होना।
साधारण फूड एलर्जी और इस स्थिति में क्या अंतर है?
अक्सर लोग इस समस्या को सामान्य मछली की एलर्जी समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में एक बड़ा अंतर है:
- सच्ची एलर्जी: यह व्यक्ति के अपने इम्यून सिस्टम की संवेदनशीलता के कारण होती है। ऐसे व्यक्ति को ताजी से ताजी मछली खाने पर भी एलर्जी होगी।
- स्काम्ब्रॉइड विषाक्तता: इसमें व्यक्ति को मछली से कोई जन्मजात एलर्जी नहीं होती। यहां तक कि एक साथ बैठकर भोजन कर रहे कई लोग एक ही समय पर इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि विषैला तत्व मछली के अनुचित भंडारण के कारण उसमें पहले से बना हुआ था।

मछली खरीदते और पकाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
समुद्री भोजन का सुरक्षित आनंद लेने के लिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है:
- ताजगी की पहचान करें: मछली खरीदते समय उसकी आंखें देखें; वे साफ, चमकदार और उभरी हुई होनी चाहिए, धंसी हुई या धुंधली नहीं। त्वचा नम और छूने पर मांस दृढ़ (Firm) होना चाहिए।
- गंध पर ध्यान दें: ताजी समुद्री मछली से समुद्र की हल्की प्राकृतिक महक आती है। यदि उसमें से तेज अमोनिया या बासी गंध आ रही हो, तो उसे कभी न खरीदें।
- कोल्ड चेन (Cold Chain) न टूटने दें: बाजार से मछली खरीदने के तुरंत बाद उसे बर्फ में रखें और जल्द से जल्द घर लाकर रेफ्रिजरेटर या फ्रीजर में स्टोर करें। उसे कमरे के सामान्य तापमान पर ज्यादा देर तक बाहर न छोड़ें।
- भोजन से पहले का स्वाद: यदि मछली खाते समय मुंह में असामान्य तीखा, कड़वा या जलन जैसा स्वाद महसूस हो, तो तुरंत खाना बंद कर दें।
आपातकालीन स्थिति में क्या किया जाता है?
यदि किसी व्यक्ति में मछली खाने के बाद चेहरे का लाल होना, सांस में रुकावट या अत्यधिक बेचैनी के लक्षण दिखें, तो बिना घरेलू नुस्खों में समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी रूम में ले जाना चाहिए।
डॉक्टर आमतौर पर एंटीहिस्टामाइन (Antihistamines), तरल ड्रिप्स और जरूरत पड़ने पर इनहेलर या स्टेरॉयड की मदद से शरीर में बढ़े हुए हिस्टामाइन के प्रभाव को नियंत्रित करते हैं। त्वरित चिकित्सकीय सहायता मिलने पर व्यक्ति कुछ ही घंटों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है।
समुद्री भोजन पोषण का बेहतरीन स्रोत है, बशर्ते उसे सही तरीके से सुरक्षित रखा गया हो। उचित तापमान पर भंडारण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता रखकर ऐसे अप्रत्याशित स्वास्थ्य जोखिमों से पूरी तरह बचा जा सकता है।