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जानिए बाइक हैंडल के छोर पर लगे इस छोटे से हिस्से के सुरक्षात्मक फायदे।
अगर आप मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाते हैं, तो आपने निश्चित रूप से अपनी बाइक के हैंडल के दोनों किनारों पर एक छोटा सा धातु का गोल टुकड़ा लगा हुआ देखा होगा। बहुत से लोग इसे सिर्फ एक सामान्य डिजाइन, फैशन या हैंडल की ग्रिप को लॉक करने वाला एक प्लास्टिक का ढक्कन समझ लेते हैं। लेकिन मैकेनिकल इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल विज्ञान की भाषा में इस छोटे से हिस्से को ‘बार एंड वेट्स’ (Bar End Weights) या ‘हैंडल बैलेंसर’ (Handle Balancer) कहा जाता है।
यह कोई साधारण सजावटी चीज नहीं है, बल्कि आपकी सवारी को सुरक्षित और आरामदायक बनाने में इसकी एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब आप तेज गति से या लंबी दूरी तक बाइक चलाते हैं, तो यह छोटा सा पार्ट आपको एक बड़ा अंतर महसूस कराता है। आइए इस लेख में विस्तार से और बहुत ही सरल शब्दों में समझते हैं कि बाइक के हैंडल पर यह पार्ट क्यों लगाया जाता है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं।

इस पार्ट के काम को समझने से पहले, हमें यह जानना होगा कि जब एक मोटरसाइकिल चलती है, तो उसके भीतर क्या प्रक्रियाएं होती हैं। किसी भी मोटरसाइकिल का मुख्य दिल उसका इंजन होता है। जब इंजन चालू होता है, तो उसके अंदर पिस्टन बहुत तेजी से ऊपर-नीचे गति करता है, जिससे ईंधन जलता है और गाड़ी को आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इंजन में बहुत तेज कंपन यानी वाइब्रेशन पैदा होता है। चूंकि इंजन सीधे बाइक के फ्रेम से जुड़ा होता है, इसलिए यह कंपन धीरे-धीरे पूरी बाइक में और अंततः हैंडल बार तक पहुँच जाता है। इसके अलावा, जब बाइक सड़क के गड्ढों, उबड़-खाबड़ रास्तों या तेज हवा के थपेड़ों से गुजरती है, तो भी हैंडल पर अतिरिक्त कंपन और झटका महसूस होता है।
हैंडल बार के सिरों पर लगे इन लोहे या भारी धातु के टुकड़ों का मुख्य काम इसी कंपन को सोखना और कम करना होता है। भौतिक विज्ञान (Physics) के एक नियम के अनुसार, यदि किसी हिलती हुई वस्तु के छोर पर अतिरिक्त वजन बढ़ा दिया जाए, तो उसके हिलने की गति (Frequency) धीमी हो जाती है। इसे ‘रेजोनेंस’ (Resonance) को नियंत्रित करना भी कहते हैं।
जब बाइक का इंजन तेज गति से चलता है, तो यह ‘बार एंड वेट्स’ अपने वजन के कारण हैंडल के दोनों किनारों को स्थिर रखने का प्रयास करते हैं। यह ठीक वैसे ही काम करता है जैसे किसी भारी पेंडुलम को हिलाने में ज्यादा बल लगता है। इसके लगे होने से इंजन का कंपन सीधे आपके हाथों तक नहीं पहुँच पाता, जिससे आपकी राइडिंग काफी स्मूथ हो जाती है।
मोटरसाइकिल निर्माता कंपनियां बिना किसी ठोस वजह के गाड़ियों में एक छोटा सा नट भी नहीं लगाती हैं। बार एंड वेट्स को लगाने के पीछे तीन मुख्य व्यावहारिक और सुरक्षात्मक कारण हैं:
यदि आप कभी किसी ऐसी पुरानी बाइक को चलाएं जिसमें यह पार्ट न लगा हो या निकाल दिया गया हो, तो आपको थोड़ी ही दूर जाने पर अपने हाथों और उंगलियों में तेज झनझनाहट महसूस होने लगेगी। लंबे समय तक अत्यधिक कंपन को सहने से हाथ सुन्न हो सकते हैं और कलाई में दर्द शुरू हो सकता है। यह बैलेंसर कंपन को आपके हाथों तक पहुँचने से रोकता है, जिससे आप बिना थके लंबी दूरी तक आसानी से सफर कर सकते हैं।
जब बाइक 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार पर होती है, तो हवा के दबाव और इंजन की उच्च आरपीएम (RPM) के कारण हैंडल के कांपने की संभावना बढ़ जाती है। यदि हैंडल स्थिर न रहे, तो गाड़ी पर से नियंत्रण खो सकता है। यह छोटा सा पार्ट हैंडल को दोनों तरफ से एक समान वजन देकर संतुलित रखता है, जिससे तेज गति में भी राइडर का आत्मविश्वास बना रहता है।

यदि किसी कारणवश आपकी बाइक सड़क पर खड़ी स्थिति में या धीमी गति में एक तरफ गिर जाती है, तो यह ‘बार एंड वेट्स’ एक रक्षक की तरह काम करते हैं। चूंकि ये हैंडल के सबसे बाहरी छोर पर होते हैं, इसलिए जमीन का सीधा झटका सबसे पहले इन्हीं पर लगता है। इससे आपकी महंगी क्लच लीवर, ब्रेक लीवर और थ्रॉटल (एक्सीलेटर) सीधे जमीन से टकराने और टूटने से बच जाते हैं।
सभी मोटरसाइकिलों में बार एंड वेट्स का वजन और आकार एक जैसा नहीं होता है। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि बाइक का इंजन कितना बड़ा और शक्तिशाली है।
आजकल के युवाओं में अपनी बाइक्स को मॉडिफाई यानी थोड़ा अलग लुक देने का काफी क्रेज रहता है। कई बार लोग बाजार से फैंसी और स्टाइलिश दिखने वाले ग्रिप कवर या हैंडल बार खरीद लेते हैं। इन नए लुक वाले हैंडल्स को लगाने के चक्कर में मैकेनिक अक्सर कंपनी द्वारा दिए गए असली भारी बार एंड वेट्स को निकाल देते हैं या उनकी जगह हल्के प्लास्टिक के कैप लगा देते हैं।
ऐसा करना सुरक्षा और आराम दोनों के लिहाज से एक गलत फैसला है। शुरुआत में भले ही आपको बाइक का लुक अच्छा लगे, लेकिन जब आप उसे हाईवे पर या तेज गति में चलाएंगे, तो आपको हैंडल में भारी कंपन का सामना करना पड़ेगा, जो आपकी राइडिंग के मजे को खराब कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह यही होती है कि कंपनी द्वारा दिए गए इस सुरक्षात्मक पार्ट के साथ कभी छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
अपनी बाइक के हर छोटे-बड़े पुर्जे के महत्व को समझना और उसकी सही देखभाल करना ही एक जिम्मेदार राइडर की पहचान है। अगली बार जब आप अपनी बाइक पर बैठें, तो हैंडल के छोर पर लगे इस छोटे से वैज्ञानिक मददगार को एक धन्यवाद जरूर दीजिएगा।
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