थायराइड को स्वस्थ रखने के लिए आज ही छोड़ें ये 6 चीजें, वरना बढ़ सकती है परेशानी
थायराइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने के आसान उपाय जानें। हमारे गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की एक…
“इस विमान में 156 लोग हैं, और कॉकपिट में दोनों पायलटों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।”
रात 2 बजकर 17 मिनट पर भारत रीजनल एयरलाइंस की उड़ान 718 लेह से दिल्ली की ओर जा रही थी। बाहर घने बादलों और बर्फीली हवा के बीच हिमालय की विशाल काली चोटियाँ धुंधली दिखाई दे रही थीं, जो किसी बड़े संकट की आहट जैसी लग रही थीं। विमान के भीतर सब कुछ इतना शांत और सामान्य था कि किसी भी यात्री को इस बात का दूर-दूर तक अंदाज़ा नहीं था कि बोइंग 737 अपनी तय ऊँचाई और सुरक्षित हवाई मार्ग को छोड़कर धौलाधार की दुर्गम पहाड़ियों की ओर धीरे-धीरे नीचे की तरफ आ रहा था।
कॉकपिट के भीतर का दृश्य बेहद चिंताजनक था। कैप्टन अरविंद मेहरा पूरी तरह शांत और अचेत स्थिति में अपनी सीट पर पीछे की ओर झुके हुए थे, जबकि फर्स्ट ऑफिसर निखिल सूद दाहिने कंट्रोल पैनल पर लुढ़के पड़े थे। उनकी हथेली उसी मुख्य नियंत्रण लीवर के पास रुकी हुई थी, जिसे वह शायद अपने होश खोने के आखिरी क्षण में पकड़कर विमान को संभालना चाहते थे। विमान में किसी भी प्रकार का कोई धमाका या बाहरी गड़बड़ी नहीं हुई थी। दरअसल, केबिन के भीतर हवा के दबाव को नियंत्रित करने वाली मुख्य स्वचालित प्रणाली (वाल्व) में कुछ गंभीर तकनीकी खराबी आ गई थी और वह खुली रह गई थी। इसके कारण विमान के भीतर की ऑक्सीजन इतनी खामोशी और धीरे-धीरे बाहर निकल गई कि यात्रियों को केवल हल्का सिरदर्द, शरीर में भारीपन और एक गहरी, आरामदायक नींद के अलावा कुछ और महसूस ही नहीं हुआ। छोटे बच्चे अपनी माँओं की गोद में चुपचाप सो गए थे और अधिकांश वयस्क यात्रियों ने यही समझा कि रात की इस लंबी और थका देने वाली उड़ान के कारण उनका शरीर आराम माँग रहा है। इसे विमानन विज्ञान की भाषा में हाइपोक्सिया (Hypoxia) कहा जाता है, जहाँ इंसान को पता भी नहीं चलता और वह धीरे-धीरे गहरी अचेतन अवस्था में चला जाता है।

इसी विमान की सीट संख्या 7C पर स्क्वाड्रन लीडर अदिति शर्मा भी अपनी सीट पर सिर पीछे टिकाए गहरी नींद में थी। उसने एक साधारण धूसर रंग की स्वेटशर्ट पहन रखी थी, जिससे कोई भी पहली नज़र में यह नहीं पहचान सकता था कि वह भारतीय वायुसेना की एक जांबाज अधिकारी है। पिछले 5 महीनों से वह जोधपुर के मुख्य वायुसेना प्रशिक्षण केंद्र में परिवहन विमानों के आपातकालीन और संकटकालीन अभियानों की मुख्य प्रशिक्षक के रूप में तैनात थी। दिन-रात की लगातार उड़ानों और कड़े सैन्य प्रशिक्षण के कारण उसका शरीर और दिमाग दोनों ही काफी थके हुए थे।
इस उड़ान के दौरान उसके मोबाइल फोन की स्क्रीन पर उसके सगे भाई रोहन का अंतिम भेजा गया संदेश खुला हुआ था, जो उसने उड़ान भरने से ठीक पहले पढ़ा था। संदेश में लिखा था— “माँ की बड़ी सर्जरी सुबह ठीक 8 बजे होनी है। अगर तुम्हें इस बार भी आने में देर हुई, तो फिर कभी घर मत आना। तुम्हारी 9 साल की बेटी अनन्या भी अब यह अच्छी तरह समझ चुकी है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी यह वर्दी और देश सेवा अपने खुद के परिवार से बहुत बड़ी है। कम से कम आज के दिन तो अपनी ज़िम्मेदारियों को भूल जातीं।”
अदिति ने उस कड़वे संदेश का कोई जवाब नहीं दिया था, क्योंकि उसके पास शब्द ही नहीं बचे थे। उसकी 9 साल की मासूम बेटी अनन्या पिछले 6 महीनों से दिल्ली में अपनी नानी के साथ रह रही थी। पारिवारिक परिस्थितियों और अनन्या के पिता के दूसरी शादी करके दूर चले जाने के बाद, अदिति ही अपनी बेटी की कानूनी अभिभावक थी। लेकिन देश की सुरक्षा और वायुसेना के कठोर नियमों के कारण वह अपनी बेटी को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही थी। उसके पूरे ससुराल और मायके के परिवार का यही आरोप था कि अदिति ने हमेशा अपनी उड़ानों और देश सेवा को अपनी बेटी के भविष्य से ऊपर रखा है। अदिति अपने दिल के किसी कोने में जानती थी कि परिवार की यह शिकायत पूरी तरह से झूठी भी नहीं थी। उसने अपनी बेटी के पिछले दो जन्मदिन, स्कूल की वार्षिक प्रस्तुतियाँ और कई महत्वपूर्ण त्योहार सिर्फ इसलिए मिस किए थे क्योंकि वह किसी न किसी रणनीतिक मिशन पर सीमा पर तैनात थी। हर बार फोन पर रोती हुई अनन्या को वह बस एक ही दिलासा देती थी— “मेरी बच्ची, अगली छुट्टी में जब मम्मा घर आएगी, तो सब कुछ ठीक कर देगी।”
आज की रात वह अपनी माँ को इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सर्जरी से पहले अपने गले से लगाना चाहती थी और अनन्या की आँखों में आँखें डालकर यह विश्वास दिलाना चाहती थी कि उसकी मम्मा ने उसे कभी छोड़ा नहीं है, बल्कि वह जो कुछ भी कर रही है, उसी के गौरवपूर्ण भविष्य के लिए कर रही है। लेकिन नियति ने उसके लिए आसमान में ही एक अलग और भयानक इम्तिहान तय कर रखा था।
ठीक उसी समय, ज़मीन पर दिल्ली एरिया एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के मुख्य रडार रूम में तनाव चरम पर था। रडार अधिकारी कबीर अंसारी ने देखा कि भारत रीजनल की उड़ान 718 पिछले दस मिनट से उनके द्वारा भेजे जा रहे किसी भी रेडियो सिग्नल या कॉल का कोई जवाब नहीं दे रही थी। कबीर ने अपनी माइक की फ्रीक्वेंसी बदलते हुए दोबारा गंभीर आवाज़ में प्रयास किया— “भारत रीजनल 718, दिल्ली कंट्रोल। यदि आप मेरी आवाज़ सुन पा रहे हैं, तो कृपया अपनी फ्रीक्वेंसी की पुष्टि करें और अपनी वर्तमान स्थिति बताएं।”
कॉकपिट की तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला। रडार स्क्रीन पर लाल रंग का वह छोटा बिंदु लगातार अपनी निर्धारित ऊँचाई को खोता जा रहा था। विमान की ऊँचाई पहले 10,600 मीटर थी, जो घटकर 10,200 हुई और देखते ही देखते वह 9,700 मीटर पर आ गई।
— “सर, यह एक संभावित केबिन प्रेशर फेलियर का मामला लग रहा है,” कबीर ने तुरंत अपने सीनियर सुपरवाइजर को बुलाकर रडार स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए कहा। “विमान का ऑटोपायलट शायद आंशिक रूप से काम कर रहा है या फिर वह पूरी तरह से असंतुलित हो चुका है। अगर इस विमान ने इसी गति और इसी दिशा में अपनी उड़ान जारी रखी, तो अगले 11 मिनट से भी कम समय में यह धौलाधार की ऊँची और पथरीली पहाड़ियों के सीधे संपर्क में आ जाएगा। हमें तुरंत कुछ करना होगा।”

यह आपातकालीन सूचना तुरंत भारतीय वायुसेना के पश्चिमी कमांड मुख्यालय तक पहुँचाई गई। संयोग से, पठानकोट हवाई अड्डे के पास वायुसेना के 2 सैन्य हेलिकॉप्टर और एक टोही विमान रात के समय नियमित युद्धाभ्यास कर रहे थे। उन्हें तुरंत अपने अभ्यास को रोककर उड़ान 718 की खोज करने और उसकी स्थिति का पता लगाने का रणनीतिक आदेश मिला। वायुसेना के विंग कमांडर विक्रम राठौड़ ने अपने विशेष सैन्य हेलिकॉप्टर “गरुड़ 2” के रोटर्स की गति को बढ़ाया और बादलों के घने घेरे के बीच से अपने चॉपर को ऊपर की ओर खींचा।
— “कंट्रोल, गरुड़ 2 से विक्रम। मौसम बेहद खराब है और विजिबिलिटी शून्य के करीब है। हम इस व्यावसायिक बोइंग 737 की तीव्र गति की बराबरी लंबे समय तक नहीं कर पाएँगे,” विक्रम ने हेडसेट के माध्यम से सूचित किया।
— “विक्रम, आपको उसकी गति की बराबरी नहीं करनी है। हमें बस उस विमान के साथ एक बार दृश्य संपर्क (Visual Contact) स्थापित करना है ताकि केबिन के भीतर की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। हमारी यात्री सूची के अनुसार, उस विमान की इकोनॉमी क्लास की सीट संख्या 7C पर हमारी वायुसेना की बेहतरीन पायलट स्क्वाड्रन लीडर अदिति शर्मा सवार हैं। यदि वह होश में हैं, तो वही इस विमान को बचा सकती हैं। किसी भी तरह केबिन क्रू तक संदेश पहुँचाओ।”
कुछ ही मिनटों के बाद, आसमान में अचानक बादलों का एक बड़ा हिस्सा फटा और चंद्रमा की हल्की रोशनी में वह विशाल व्यावसायिक विमान “गरुड़ 2” के ठीक सामने उभर कर आया। विमान की मुख्य लैंडिंग लाइटें पूरी तरह बंद थीं, उसकी नाक खतरनाक तरीके से नीचे की ओर झुकी हुई थी और वह सीधे पहाड़ों की अंधेरी घाटियों की तरफ बढ़ रहा था।
— “गरुड़ 2 से दिल्ली कंट्रोल। स्थिति अत्यंत नाजुक है। विमान पूरी तरह से अनियंत्रित दिख रहा है और उसकी ऊँचाई तेज़ी से गिर रही है,” विक्रम की आवाज़ में तनाव साफ महसूस किया जा सकता था।
इधर, एयरलाइन के मुख्य ऑपरेशन सेंटर ने सूझबूझ से काम लेते हुए उस बोइंग विमान के आगे की गैली (रसोई क्षेत्र) में लगे सैटेलाइट फोन को सीधे ज़मीन से सक्रिय किया और उस पर लगातार लाउड रिंगर बजाना शुरू किया। उस तीखी और लगातार बजने वाली घंटी की आवाज़ से विमान की मुख्य एयर होस्टेस नेहा कपूर की नींद अचानक खुली। वह गैली के ठंडे फर्श पर गिरी हुई थी, उसका सिर बुरी तरह घूम रहा था और उसके पैरों में खड़े होने की बिल्कुल भी ताकत नहीं थी। केबिन में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण उसका दम घुट रहा था। लेकिन अपने पेशेवर दायित्वों को याद करते हुए, वह सीटों के कोनों और दीवारों को पकड़ते हुए किसी तरह उस बजते हुए सैटेलाइट फोन तक पहुँची और काँपते हाथों से रिसीवर उठाया।
— “हैलो… कौन बोल रहा है? विमान में सब लोग सो रहे हैं… मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा है…” नेहा ने लड़खड़ाते हुए कहा।
फोन के दूसरी तरफ से विंग कमांडर विक्रम की बेहद गंभीर और कड़क आवाज़ आई— “मेरी बात बहुत ध्यान से सुनो। तुम्हारे कॉकपिट के दोनों पायलट इस समय पूरी तरह अचेत हैं और वे रेडियो कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं। तुम लोग धौलाधार की पहाड़ियों की तरफ बढ़ रहे हो और तुम्हारे पास केवल 9 मिनट से भी कम का समय बचा है। तुम्हारी यात्री सूची के अनुसार, सीट संख्या 7C पर भारतीय वायुसेना की पायलट अदिति शर्मा बैठी हैं। वे आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में विशेषज्ञ हैं। अपनी पूरी ताकत लगाओ और उन्हें अभी के अभी जगाओ। वही तुम सबकी आखिरी उम्मीद हैं।”
नेहा ने फोन का रिसीवर छोड़ा और झुकते हुए, डगमगाते कदमों से मुख्य यात्री गलियारे की तरफ आगे बढ़ी। केबिन का दृश्य देखकर उसकी रूह काँप गई। सभी यात्री अपनी सीटों पर अप्राकृतिक रूप से ढीले पड़े हुए थे। एक छोटा बच्चा अपनी माँ के कंधे पर बेहोशी की हालत में हल्की साँसें ले रहा था। पास की सीट पर बैठे एक बुजुर्ग व्यक्ति के हाथ से उनकी प्रार्थना माला नीचे फर्श पर गिर चुकी थी। पूरा केबिन एक भूतिया खामोशी के आगोश में था।
पंक्ति संख्या 7 के पास पहुँचकर नेहा ने देखा कि अदिति अपनी स्वेटशर्ट का हुड सिर पर खींचे शांत बैठी थी। नेहा ने आगे बढ़कर अपनी पूरी ताकत से उसके कंधे को हिलाया।
— “मैम, कृपया उठिए… मेरी बात सुनिए मैम…” नेहा ने कमज़ोर आवाज़ में कहा। लेकिन अदिति की तरफ से कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं हुई। हाइपोक्सिया का असर उस पर भी हो रहा था।
नेहा ने हार नहीं मानी। उसने अपने दोनों हाथों से अदिति के दोनों कंधों को पूरी ताकत से झकझोरा और रोते हुए चिल्लाई— “स्क्वाड्रन लीडर अदिति शर्मा! कृपया अपनी आँखें खोलिए… हम एक बहुत बड़ी तकनीकी मुसीबत में हैं… अगर आप नहीं उठीं तो इस विमान का कोई भी व्यक्ति सुबह का सूरज नहीं देख पाएगा। कृपया उठिए!”
देश सेवा के कड़े प्रशिक्षण और ‘स्क्वाड्रन लीडर’ शब्द के सम्मोहन ने अदिति के मस्तिष्क में एक बिजली सी दौड़ाई। उसकी आँखें अचानक पूरी तरह खुल गईं। वायुसेना के अनुशासन ने उसके शरीर के आलस को एक झटके में गायब कर दिया। उसने तुरंत अपने सामने के झुके हुए गलियारे, केबिन में जल रही एम्बर रंग की आपातकालीन लाइटों, ऑक्सीजन मास्क के पैनलों और यात्रियों की अचेत हालत का बारीकी से निरीक्षण किया। मात्र 2 सेकंड के भीतर उसकी सारी नींद और थकान हवा हो गई। उसे स्थिति की गंभीरता को समझने में देर नहीं लगी।
— “दोनों मुख्य पायलट कहाँ हैं? और केबिन का दबाव इस तरह क्यों गिरा?” अदिति ने अपनी सीट बेल्ट खोलते हुए अत्यंत कड़क और पेशेवर आवाज़ में पूछा।
नेहा ने काँपती हुई उंगली से कॉकपिट के मुख्य बख्तरबंद और सुरक्षित दरवाजे की ओर इशारा किया— “दोनों पायलट अंदर ही हैं मैम… लेकिन वे अंदर से अचेत हो चुके हैं और यह आपातकालीन इलेक्ट्रॉनिक दरवाजा बाहर के किसी भी कोड या चाबी से खुल नहीं रहा है। इसका मुख्य डिजिटल पैनल पूरी तरह से जाम हो चुका है।”
ठीक उसी क्षण, विमान हवा के एक बहुत बड़े दबाव के क्षेत्र से गुज़रा और ज़ोर से नीचे की ओर धँसा। केबिन के ऊपर बने सामान रखने के कई लॉकर झटके से खुल गए और एक भारी सूटकेस बीच गलियारे में आ गिरा। विमान के मुख्य कॉकपिट स्पीकर से एक कंप्यूटर जनित स्वचालित चेतावनी की भारी आवाज़ गूंज उठी— “वार्निंग! टेरेन अहेड… पुल अप! तुरंत नियंत्रण संभालें।” इसका सीधा मतलब था कि विमान पहाड़ों के बहुत करीब पहुँच चुका था।
नेहा फर्श पर बैठ गई और रोते हुए बोली— “यह मुख्य डिजिटल दरवाजा पिछले हफ्ते भी लेह हवाई अड्डे पर पूरी तरह जाम हुआ था। हमारे ग्राउंड इंजीनियरों ने इस खराबी को अपनी लॉग बुक में दर्ज किया था, लेकिन एयरलाइन कंपनी के प्रबंधन ने कहा था कि अभी त्योहारों और छुट्टियों की भारी भीड़ है, इसलिए इस बड़े विमान को ग्राउंडेड करके राजस्व का नुकसान नहीं झेल सकते। त्योहारों के बाद इसे ठीक करेंगे। यहाँ तक कि एक वरिष्ठ इंजीनियर ने केबिन प्रेशर वाल्व को तुरंत बदलने की सख्त लिखित सलाह भी दी थी, लेकिन लागत बचाने के चक्कर में उसकी बात को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया।”
नेहा की यह बात सुनकर अदिति का पूरा शरीर स्थिर हो गया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और दृढ़ता आ गई। अब यह मामला सिर्फ एक सामान्य या दैवीय तकनीकी दुर्घटना का नहीं था। यह साफ तौर पर एक आपराधिक लापरवाही थी, जहाँ चंद पैसों के फायदे के लिए किसी ने 156 निर्दोष लोगों की जान को सीधे खतरे में डाल दिया था।
तभी कॉकपिट के भीतर से एक और भारी हलचल हुई। ऐसा लगा कि अचेत पड़े फर्स्ट ऑफिसर का शरीर पूरी तरह से मुख्य कंट्रोल योक (स्टीयरिंग) पर गिर गया था, जिसके कारण विमान का संतुलन और भी अधिक बिगड़ गया और उसकी नाक और तेज़ी से नीचे पहाड़ों की गहरी खाई की तरफ झुकने लगी। केबिन में चीख-पुकार जैसी स्थिति बनने लगी थी जो लोग हल्के होश में थे।
अदिति ने बिना एक सेकंड भी गंवाए स्थिति का मूल्यांकन किया। कॉकपिट का दरवाजा सैन्य स्तर की सुरक्षा से लैस था, जिसे सामान्य हाथों से तोड़ना पूरी तरह असंभव था। लेकिन अदिति एक साधारण यात्री नहीं थी, वह भारतीय वायुसेना की आपातकालीन अभियानों की मास्टर ट्रेनर थी। उसने केबिन क्रू के पास रखे विशेष फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) और गैली से एक भारी लोहे का बार उठाया। उसने नेहा से कहा— “सभी यात्रियों को जितना हो सके ऑक्सीजन मास्क लगाने में मदद करो। मैं इस दरवाजे को खोलने का एक अंतिम प्रयास करने जा रही हूँ।”
अदिति ने वायुसेना में सीखे गए अपने यांत्रिक ज्ञान का उपयोग करते हुए दरवाजे के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक पैनल के तारों को बाहर निकाला। उसने उन तारों को आपस में शॉर्ट-सर्किट किया ताकि दरवाजे का हाइड्रोलिक लॉक सिस्टम एक पल के लिए रिलीज हो सके। जैसे ही पैनल से चिंगारी निकली, अदिति ने भारी लोहे के बार से दरवाजे के मुख्य हिंज पर पूरी ताकत से प्रहार किया। उसके हाथों से खून निकलने लगा था, लेकिन उसका ध्यान सिर्फ सामने दिख रहे रडार अल्टीमीटर पर था जो लगातार कम हो रहा था। तीन बार के भीषण प्रहार के बाद, एक भारी आवाज़ के साथ कॉकपिट का वह अभेद्य दरवाजा थोड़ा सा पीछे की ओर खुला।
अदिति तुरंत अंदर घुसी। कॉकपिट में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम थी। उसने बिना समय गंवाए कैप्टन की सीट से अचेत पड़े अरविंद मेहरा को पीछे की तरफ खींचा और खुद कैप्टन की सीट पर बैठ गई। उसने तुरंत अपने चेहरे पर पायलट का ऑक्सीजन मास्क लगाया, जिससे उसके फेफड़ों में शुद्ध हवा पहुँची और उसका दिमाग पूरी तरह सक्रिय हो गया।
सामने की विंडशील्ड से बर्फ की सफेद चादर से ढके पहाड़ों की चोटियाँ साफ दिखाई दे रही थीं, जो विमान से मात्र कुछ सौ फीट की दूरी पर थीं। अदिति ने अपनी दोनों हथेलियों से मुख्य कंट्रोल योक को मजबूती से पकड़ा और उसे अपनी तरफ पीछे खींचने का प्रयास किया। लेकिन फर्स्ट ऑफिसर का शरीर दूसरे कंट्रोल पर झुके होने के कारण लीवर जाम हो रहा था। अदिति ने अपने बाएं पैर से उन्हें थोड़ा पीछे धकेला और अपनी पूरी शारीरिक और मानसिक ताकत को एक जगह केंद्रित करते हुए चिल्लाई— “आज यह वर्दी और देश के नागरिकों की जान हार नहीं सकती!”
उसने पूरी ताकत से योक को पीछे खींचा। बोइंग 737 के इंजन गर्जना कर उठे। विमान के पंख हवा के भारी दबाव से काँपने लगे। विमान की नाक धीरे-धीरे पहाड़ों की चोटी से ठीक पचास मीटर ऊपर की तरफ उठी। विमान पहाड़ को छूते-छूते बच गया और सीधे खुले आसमान की ओर बढ़ गया। अदिति ने तुरंत ऑटोपायलट को मैन्युअल मोड पर लिया, केबिन के दबाव को स्थिर करने के लिए आपातकालीन वाल्व को मैन्युअल रूप से सेट किया और रेडियो फ्रीक्वेंसी को 121.5 पर सेट करते हुए दिल्ली एटीसी को संदेश भेजा— “दिल्ली कंट्रोल, यह गरुड़ मिशन से स्क्वाड्रन लीडर अदिति शर्मा है। मैं भारत रीजनल 718 का नियंत्रण संभाल चुकी हूँ। विमान अब पूरी तरह स्थिर है और हम दिल्ली हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग के लिए आ रहे हैं। कृपया रनवे खाली रखें।”
रडार रूम में कबीर अंसारी और वायुसेना के मुख्यालय में बैठे सभी अधिकारियों ने राहत की गहरी साँस ली। पूरे एटीसी रूम में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
सुबह के ठीक 4 बजकर 42 मिनट पर, अदिति ने उस विशाल बोइंग 737 विमान को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे नंबर 28 पर सुरक्षित लैंड करा दिया। रनवे पर पहले से ही दर्जनों एम्बुलेंस, दमकल गाड़ियाँ और वायुसेना के विशेष वाहन तैनात थे। सभी 156 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों के लिए अदिति किसी भगवान से कम नहीं थी। हवाई अड्डे के वीआईपी लाउंज में वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और नागरिक उड्डयन मंत्रियों ने अदिति का स्वागत किया और उसकी अदम्य वीरता की सराहना की।
लेकिन अदिति का मन अभी भी अपनी माँ की सर्जरी और अपनी बेटी अनन्या में अटका हुआ था। उसने अधिकारियों से औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जाने की अनुमति माँगी। जैसे ही वह लाउंज से बाहर निकलने वाली थी, उड्डयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ सुरक्षा जांच अधिकारी और उसके पुराने मित्र कबीर अंसारी उसके पास आए। कबीर के चेहरे पर गंभीर चिंता के भाव थे।
— “अदिति, तुमने आज जो किया वह एक चमत्कार है। लेकिन इस विमान के ब्लैक बॉक्स और ग्राउंड मेंटेनेंस के डिजिटल सर्वर से हमें कुछ ऐसी चीज़ें मिली हैं, जिन्हें तुम्हें देखना और सुनना बेहद ज़रूरी है। यह सिर्फ एक एयरलाइन की लापरवाही का मामला नहीं है,” कबीर ने बड़े ही गुप्त लहजे में कहते हुए अदिति के हाथ में एक छोटा वॉयस रिकॉर्डर और कुछ वित्तीय दस्तावेज़ थमा दिए।
अदिति ने कौतूहलवश उस रिकॉर्डर का प्ले बटन दबाया और इयरफोन कान में लगाया। जैसे ही आवाज़ शुरू हुई, अदिति के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। रिकॉर्डर से आ रही आवाज़ किसी अजनबी की नहीं, बल्कि उसके सगे भाई रोहन और भारत रीजनल एयरलाइंस के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की थी।
रिकॉर्डिंग में रोहन कह रहा था— “सर, मैंने अपनी बहन अदिति के फ्लाइट शेड्यूल की पूरी जानकारी आपके मेंटेनेंस मैनेजर को दे दी थी। मुझे पता था कि वह आज रात की इसी लेह-दिल्ली फ्लाइट से आने वाली है। आपने जैसा कहा था, उस विमान के केबिन प्रेशर सिस्टम की खराबी को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया ताकि कंपनी को पुराना बीमा क्लेम (Insurance Claim) मिल सके और सारा दोष पायलटों की गलती पर मढ़ा जा सके। बदले में जो ₹4 करोड़ की राशि मेरे गुप्त विदेशी खाते में आनी थी, उसकी पहली किस्त अभी तक ट्रांसफर नहीं हुई है। मेरी बहन अगर इस दुर्घटना में गायब हो जाती है, तो वायुसेना से मिलने वाला उसका पूरा फंड, उसकी विशाल बीमा राशि और उसकी बेटी अनन्या की कस्टडी भी कानूनी रूप से मेरे और मेरी माँ के पास आ जाएगी। जिससे हम अपना नया बिज़नेस शुरू कर सकते हैं। बस काम साफ होना चाहिए।”
दूसरी तरफ से एयरलाइन अधिकारी की आवाज़ आई— “चिंता मत करो रोहन, सिस्टम पूरी तरह फेल होने के लिए ही सेट किया गया था। इतिहास में इसे सिर्फ एक तकनीकी खराबी माना जाएगा। किसी को कभी शक नहीं होगा। तुम्हारी बहन कभी वापस नहीं आएगी।”
रिकॉर्डिंग यहीं समाप्त हो गई। अदिति का दिल भारी हो गया और उसकी आँखों से ठंडे आँसू बहने लगे। जिस भाई के संदेश को पढ़कर वह रात भर ग्लानि में डूबी रही, जिस परिवार के तानों को वह अपनी कमी समझकर सहती रही, वे लोग ज़मीन पर बैठकर उसकी मौत और उसकी मासूम बेटी अनन्या के भविष्य को बेचने का घिनौना सौदा कर रहे थे। असली धोखा आसमान की उन बर्फीली हवाओं में नहीं था, बल्कि उसके अपने ही घर के भीतर, उसके बेहद करीब बैठा हुआ था।
अदिति ने अपने आँसू पोंछे, अपने फोन को जेब में रखा और अपनी वर्दी की टोपी को ठीक करते हुए कबीर की तरफ देखा। उसकी आँखों में अब दुख नहीं, बल्कि एक जांबाज सैनिक का फौलादी गुस्सा था।
— “कबीर, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और वायुसेना की खुफिया विंग को तुरंत एक्टिव करो। सुबह के 6 बज रहे हैं। माँ की सर्जरी से पहले, मुझे अपने घर की इस सबसे बड़ी गंदगी को साफ करना है,” अदिति ने अत्यंत दृढ़ता से कहा।
वह हवाई अड्डे से बाहर निकली, जहाँ सुबह की पहली किरण उसकी वर्दी पर पड़ रही थी। उसने साबित कर दिया था कि वर्दी सिर्फ एक कपड़ा या नौकरी नहीं, बल्कि सच्चाई और न्याय की वो ढाल है जो अपनों के दिए सबसे गहरे घावों को भी भरने की ताकत रखती है।
आपकी राय में इस पूरी परिस्थिति में सबसे बड़ा और अक्षम्य अपराध किसका था—चंद पैसों और स्वार्थ के लिए अपनी सगी बहन की जान का सौदा करने वाले भाई रोहन का, अपनी आँखों के सामने सब कुछ जानते हुए भी चुप रहने वाले एयरलाइन प्रबंधन का, या देश सेवा के चक्कर में अपने ही परिवार के भीतर पनप रहे इस खतरनाक सच को न पहचान पाने वाली अदिति की मजबूरी का?
थायराइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने के आसान उपाय जानें। हमारे गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की एक…
सोते समय नसों को ठीक करने का आसान तरीका जानें। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता…
— लो, अपनी दादी को संभालो। घर की सबसे समझदार लड़की बनती हो न, कम से कम जीवन में एक…
जानिए बाइक हैंडल के छोर पर लगे इस छोटे से हिस्से के सुरक्षात्मक फायदे। अगर आप मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाते…
रात में बेहतर नींद और ब्लड शुगर को संतुलित रखने के आसान उपाय। क्या आपकी नींद भी रात में बार-बार…
“इस विमान में 156 लोग हैं, और कॉकपिट में दोनों पायलटों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।” रात 2…