मिल गया! 13 साल से लापता “बोइंग 737” आखिर एयरपोर्ट के बीचों-बीच खड़ा मिला
एयरपोर्ट पर मिला “लापता विमान”! 13 साल से गायब Boeing 737 अचानक फिर सामने आया भारत में एक अजीबोगरीब मामला…
फ्रिज में खाना रखने की एक छोटी सी चूक सेहत पर भारी पड़ सकती है।
हाल ही में सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। साठ वर्ष के एक व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द और अचानक मानसिक भ्रम जैसी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि वे ‘मेनिनजाइटिस’ यानी मस्तिष्क की सुरक्षात्मक परतों में होने वाले गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। आमतौर पर ऐसे मामलों में लोग बाहरी संक्रमण या मौसम के बदलाव को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन इस मामले में जब चिकित्सकों ने उनके खान-पान और जीवनशैली की पड़ताल की, तो असली वजह उनके घर के फ्रिज में छिपी मिली।
जांच में सामने आया कि व्यक्ति ने कई दिनों पहले पकाकर फ्रिज में रखा हुआ बिना ढका खाना और बासी शोरबा (सूप/ब्रोथ) बिना पर्याप्त रूप से दोबारा गर्म किए खा लिया था। फ्रिज के अंदर ठंडक में भी पनपने वाले एक विशेष बैक्टीरिया, जिसे ‘लिस्टीरिया मोनोसाइटोजेन्स’ (Listeria monocytogenes) कहा जाता है, ने उस भोजन को दूषित कर दिया था। इसी दूषित भोजन के सेवन से यह बैक्टीरिया उनके पाचन तंत्र से होते हुए रक्तप्रवाह और फिर तंत्रिका तंत्र तक पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें यह गंभीर शारीरिक स्थिति देखनी पड़ी। समय पर उचित चिकित्सा मिलने से उनकी स्थिति को स्थिर किया जा सका, लेकिन इस घटना ने घरेलू स्वच्छता और खानपान के तौर-तरीकों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

अधिकांश लोगों का यह पक्का विश्वास होता है कि किसी भी पके हुए भोजन को यदि फ्रिज के अंदर रख दिया जाए, तो वह पूरी तरह से सुरक्षित और रोगाणु-मुक्त रहता है। आम धारणा यह है कि कम तापमान सभी प्रकार के सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय कर देता है। हालांकि, आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान हमें बताता है कि ऐसा हर बैक्टीरिया के साथ नहीं होता। लिस्टीरिया एक ऐसा अनोखा और जिद्दी रोगाणु है, जो कम तापमान यानी सामान्य घरेलू फ्रिज के चार डिग्री सेल्सियस या उससे भी कम ठंडक में न केवल जीवित रहता है, बल्कि धीरे-धीरे अपनी संख्या भी बढ़ाता रहता है।
यह बैक्टीरिया विशेष रूप से बासी मीट, हड्डियों के उबले हुए पानी, बिना पाश्चुरीकृत दूध से बने उत्पादों, कई दिनों तक रखी पकी हुई सब्जियों और खुले में रखे ठंडे व्यंजनों में तेजी से पनपता है। जब फ्रिज में कच्चा मांस और पका हुआ भोजन एक साथ बिना ठीक से ढके रखे जाते हैं, तो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में बैक्टीरिया का प्रसार बेहद आसान हो जाता है। इस स्थिति को चिकित्सा जगत में ‘क्रॉस-कंटामिनेशन’ कहा जाता है।
लिस्टीरिया संक्रमण को आमतौर पर ‘लिस्टिरियोसिस’ कहा जाता है। यह संक्रमण सामान्य तौर पर हल्के पेट दर्द या सामान्य बुखार जैसा लग सकता है, लेकिन कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों या वरिष्ठ नागरिकों के शरीर में यह अत्यंत जटिल रूप ले सकता है। जब यह रोगाणु आंतों की दीवार को पार करके रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने लगता है।
इसके बाद यह बैक्टीरिया मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली सुरक्षात्मक झिल्लियों (जिन्हें मेनिंगेस कहा जाता है) तक पहुंच जाता है। वहां पहुंचकर यह तेज सूजन और संक्रमण पैदा करता है, जिसे हम मेनिनजाइटिस के नाम से जानते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
यदि इन लक्षणों की तुरंत पहचान न की जाए और समय रहते उचित चिकित्सीय सलाह न ली जाए, तो यह स्थिति शरीर के पूरे तंत्रिका तंत्र को लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकती है।

हम में से अधिकांश लोग अनजाने में अपने घर के फ्रिज का उपयोग इस तरह करते हैं जो बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देता है। आइए उन आम गलतियों को समझें जो इस प्रकार के जोखिम को बढ़ाती हैं:
अपने परिवार को रसोई जनित संक्रमणों से सुरक्षित रखने के लिए कुछ बुनियादी और अत्यंत सरल नियमों का पालन करना अनिवार्य है। स्वच्छता और जागरूकता ही इस प्रकार के स्वास्थ्य संकटों से बचने की सबसे मजबूत ढाल हैं:
बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से धीमी होने लगती है। यही कारण है कि साठ वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और किसी पुरानी स्वास्थ्य स्थिति से जूझ रहे लोगों पर खाद्य जनित रोगाणुओं का असर बहुत तेजी से होता है।
ऐसे व्यक्तियों के खान-पान में बासी भोजन का उपयोग न्यूनतम होना चाहिए। हमेशा ताजा पके हुए, सुपाच्य और स्वच्छ वातावरण में तैयार किए गए भोजन को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश फ्रिज में रखा भोजन खाना भी पड़े, तो यह सुनिश्चित करना परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वह पूरी तरह से स्वच्छ हो और उसे उचित तापमान पर खौलाया गया हो।
रसोई केवल खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यह परिवार के स्वास्थ्य की पहली प्रयोगशाला है। रसोई में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही पूरे घर के स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है। चॉपिंग बोर्ड, बर्तनों और पोंछने वाले कपड़ों की नियमित सफाई उतनी ही आवश्यक है जितनी कि ताजी सामग्री की खरीदारी।
कच्ची सब्जियों और मीट के लिए अलग-अलग चॉपिंग बोर्ड और चाकुओं का प्रयोग करें। खाना बनाने और परोसने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना एक ऐसी बुनियादी आदत है जो आधे से अधिक संक्रमणों को घर में प्रवेश करने से रोक सकती है।
अस्पताल में भर्ती हुए उस व्यक्ति की यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। फ्रिज हमारे जीवन को आसान बनाने वाला एक आधुनिक उपकरण जरूर है, लेकिन यह किसी भोजन को हमेशा के लिए अमर नहीं बना सकता। भोजन का सुरक्षित रख-रखाव, उचित तापमान का ध्यान और बासी खाने को लेकर वैज्ञानिक समझ ही हमें और हमारे प्रियजनों को ऐसे छिपे हुए खतरों से बचा सकती है। अगली बार जब भी आप फ्रिज का दरवाजा खोलें, तो यह जरूर याद रखें कि सही ढक्कन और स्वच्छता आपके जीवन को बड़ी परेशानियों से सुरक्षित रख सकती है।
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