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जानिए स्टेटिन दवाओं का सच और अपनी हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने के उपाय।
आज के समय में सेहत का ख्याल रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब भी हम रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए जाते हैं और ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट आती है, तो सबसे पहले हमारा ध्यान ‘कोलेस्ट्रॉल’ के स्तर पर जाता है। अगर कोलेस्ट्रॉल थोड़ा भी बढ़ा हुआ दिखे, तो अक्सर तुरंत ‘स्टेटिन’ नाम की दवाएं लिख दी जाती हैं। दुनिया भर में करोड़ों लोग रोज़ाना इन दवाओं का सेवन करते हैं। लोगों का मानना है कि यह दवा उनके दिल को सुरक्षित रखती है। लेकिन हाल के दिनों में कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इस पर एक नई बहस छेड़ दी है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेटिन शायद चिकित्सा इतिहास की सबसे अधिक बेची जाने वाली और ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक बन चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या वाकई हर उस व्यक्ति को स्टेटिन की ज़रूरत है जिसका कोलेस्ट्रॉल थोड़ा बढ़ा हुआ है? आइए इस पूरे विषय को गहराई से समझते हैं ताकि आप अपनी सेहत को लेकर एक सही और जागरूक निर्णय ले सकें।

इससे पहले कि हम स्टेटिन दवाओं के बारे में बात करें, हमारे लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कोलेस्ट्रॉल वास्तव में क्या है। हमारे समाज में कोलेस्ट्रॉल को एक विलेन या दुश्मन की तरह पेश किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक वसायुक्त (fatty) तत्व है, जो लीवर द्वारा बनाया जाता है। यह हमारे शरीर के ठीक से काम करने के लिए बेहद आवश्यक है।
कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
कोलेस्ट्रॉल मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, जिसे आमतौर पर ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है:
स्टेटिन दवाओं का एक ऐसा समूह है जो रक्त में एलडीएल (बुरा) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए डॉक्टरों द्वारा निर्धारित किया जाता है। ये दवाएं लीवर में जाकर एक विशेष एंजाइम को ब्लॉक कर देती हैं। यह एंजाइम शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनाने के लिए ज़िम्मेदार होता है। जब यह एंजाइम ब्लॉक हो जाता है, तो लीवर कम कोलेस्ट्रॉल बनाता है, जिससे खून में इसका स्तर गिर जाता है।
दशकों से स्टेटिन को दिल की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच माना जाता रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है। यही वजह है कि आज के समय में दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ से अधिक लोग रोज़ाना इस दवा का सेवन कर रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि अगर यह दवा इतनी असरदार है, तो इसे लेकर विवाद क्यों हो रहा है? दरअसल, कई आधुनिक शोधों और स्वतंत्र डॉक्टरों ने इस बात पर चिंता जताई है कि स्टेटिन दवाओं को बिना सोचे-समझे बहुत बड़े पैमाने पर प्रिसक्राइब किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी होगी ही। दिल की सेहत पर असर डालने वाले कई अन्य कारक भी होते हैं, जैसे कि शरीर में सूजन (inflammation), मानसिक तनाव, खराब जीवनशैली, और इंसुलिन रेजिस्टेंस। लेकिन आज के समय में केवल ब्लड टेस्ट की एक रिपोर्ट देखकर सीधे स्टेटिन दवाएं शुरू कर दी जाती हैं, जो कि सही दृष्टिकोण नहीं है।

इस विवाद के केंद्र में एक वैज्ञानिक अवधारणा है जिसे ‘नंबर नीडेड टू Treat’ (NNT) कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, NNT का मतलब है कि किसी एक व्यक्ति को बीमारी से बचाने के लिए कितने लोगों को वह दवा लगातार कई सालों तक खिलानी पड़ेगी।
स्टेटिन दवाओं के मामले में यह संख्या बेहद चौंकाने वाली है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों को पहले कभी दिल का दौरा नहीं पड़ा है, उनमें से लगभग 200 लोगों को लगातार 5 साल तक स्टेटिन दवा खानी पड़ती है, तब जाकर केवल 1 व्यक्ति को दिल की किसी बड़ी समस्या से बचाया जा पाता है। इसका मतलब यह हुआ कि बाकी के 199 लोगों को इस दवा से कोई सीधा फायदा नहीं मिल रहा होता है, लेकिन वे इसके संभावित दुष्प्रभावों का सामना ज़रूर कर रहे होते हैं। यह एक ऐसा सच है जिसके बारे में आम तौर पर मरीज़ों को नहीं बताया जाता है।
हर एलोपैथिक दवा की तरह स्टेटिन के भी कुछ दुष्प्रभाव होते हैं। कई लोग इन दवाओं को सालों तक बिना किसी परेशानी के लेते हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी ऐसी भी है जो इसके साइड इफेक्ट्स से परेशान रहती है।
स्टेटिन के प्रमुख साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं:
इसके अलावा, स्टेटिन दवाएं हमारे शरीर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोषक तत्व की कमी कर देती हैं, जिसे कोएंजाइम Q10 (CoQ10) कहा जाता है। कोएंजाइम Q10 हमारे शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा बनाने के लिए बेहद ज़रूरी होता है, खासकर हमारे दिल की मांसपेशियों के लिए। चूंकि स्टेटिन कोलेस्ट्रॉल बनाने वाले रास्ते को ब्लॉक करती हैं, इसलिए वे अनजाने में CoQ10 के उत्पादन को भी रोक देती हैं। शरीर में CoQ10 की कमी होने से ही मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण पैदा होते हैं।
इस जानकारी को पढ़ने के बाद आपके मन में यह विचार आ सकता है कि क्या आपको आज ही से अपनी स्टेटिन दवा बंद कर देनी चाहिए? इसका जवाब है— बिल्कुल नहीं।
यह लेख आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक बनाने के लिए है। किसी भी दवा को खुद से बंद करना खतरनाक हो सकता है। यदि आपको पहले कभी दिल से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो चुकी है, तो आपके लिए स्टेटिन बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि यह धमनियों में जमा प्लाक को स्थिर रखने में मदद करती है।
आपको जो करने की ज़रूरत है, वह यह है कि आप अपने डॉक्टर के पास जाएं और उनसे इस विषय पर खुलकर बात करें। उनसे पूछें कि क्या आपकी जीवनशैली में बदलाव करके कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है या क्या दवा की खुराक को कम किया जा सकता है।
दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय, यदि हम अपनी दिनचर्या और खान-पान में कुछ बदलाव करें, तो कोलेस्ट्रॉल को बहुत आसानी से और सुरक्षित तरीके से संतुलित रखा जा सकता है। यहाँ कुछ आसान और प्रभावी उपाय दिए गए हैं:
जब आप अगली बार अपने डॉक्टर से मिलें, तो एक जागरूक मरीज़ की तरह उनसे निम्नलिखित सवाल ज़रूर पूछें:
अपनी सेहत की ज़िम्मेदारी अपने हाथों में लेना ही स्वस्थ रहने का पहला कदम है। दवाओं का उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब वे बेहद ज़रूरी हों। हमेशा अपने शरीर की सुनें, सही खान-पान अपनाएं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले अपने डॉक्टर से उचित परामर्श लें।
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