डॉक्टर की चेतावनी: अदरक खाने से हो सकते हैं ये असर, जानें किन लोगों को सावधान रहना चाहिए
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किसी रक्त नमूने को देखकर उसका रंग सामान्य से बिल्कुल अलग दिखाई दे, तो यह स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा कर सकता है। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर में एक युवा महिला के रक्त का प्लाज़्मा दूध जैसा सफेद दिखाई देता है। हालांकि ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर सनसनीखेज दावों के साथ साझा की जाती हैं, लेकिन चिकित्सकीय रूप से असामान्य रूप से सफेद या धुंधला प्लाज़्मा कुछ परिस्थितियों में रक्त में ट्राइग्लिसराइड यानी वसा के बहुत अधिक स्तर से जुड़ा हो सकता है।
ट्राइग्लिसराइड शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का वसा है। भोजन से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी को शरीर ट्राइग्लिसराइड के रूप में जमा करता है और जरूरत पड़ने पर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करता है। सामान्य रूप से उपवास के दौरान ट्राइग्लिसराइड का स्तर 150 mg/dL से कम माना जाता है, जबकि 500 mg/dL या उससे अधिक को बहुत अधिक स्तर माना जाता है।
बहुत अधिक ट्राइग्लिसराइड होने पर रक्त का प्लाज़्मा अधिक सफेद या दूधिया दिखाई दे सकता है। इसे देखकर किसी व्यक्ति को खुद से बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि रक्त का रूप कई परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए रक्त जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है।
ऐसे बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन, वजन बढ़ना, अनियंत्रित मधुमेह, कुछ दवाएं और कुछ आनुवंशिक स्थितियां इसके कारणों में शामिल हो सकती हैं। कुछ लोगों में परिवार से मिली प्रवृत्ति के कारण ट्राइग्लिसराइड असामान्य रूप से बढ़ सकता है।
इस स्थिति को नजरअंदाज करना उचित नहीं है, खासकर तब जब जांच में ट्राइग्लिसराइड बहुत अधिक पाया जाए। अत्यधिक ट्राइग्लिसराइड स्तर तीव्र अग्न्याशयशोथ यानी पैंक्रियाटाइटिस का जोखिम बढ़ा सकता है। Mayo Clinic के अनुसार, जब ट्राइग्लिसराइड का स्तर बहुत ज्यादा होता है, तब अग्न्याशय में अचानक सूजन होने का खतरा बढ़ सकता है।
पैंक्रियाटाइटिस के संभावित लक्षणों में पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, पीठ की ओर फैलता दर्द, मतली, उल्टी, बुखार और तेज धड़कन शामिल हो सकते हैं। अचानक या गंभीर पेट दर्द होने पर चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना और मधुमेह जैसी स्थितियों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि किसी जांच में ट्राइग्लिसराइड अधिक आता है, तो डॉक्टर कारण के अनुसार भोजन, जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर दवा की सलाह दे सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल किसी तस्वीर या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को कौन-सी बीमारी है। दूध जैसा दिखने वाला रक्त नमूना निश्चित निदान नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
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