नेल पॉलिश और सेहत: क्या आपके पसंदीदा नेल पेंट में छिपा है कोई रासायनिक जोखिम?
सुंदर नाखूनों के साथ सेहत की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें।
हाथों और नाखूनों की खूबसूरती को निखारने के लिए नेल पॉलिश लगाना आज अधिकांश महिलाओं की दैनिक सौंदर्य दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। विभिन्न रंगों और शेड्स के साथ नाखूनों को सजाना न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि यह स्टाइल और व्यक्तिगत देखभाल का भी प्रतीक माना जाता है। हालांकि, बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि इन चमकदार रंगों के पीछे कौन-कौन से रासायनिक यौगिक मौजूद होते हैं और वे हमारे शरीर पर किस प्रकार प्रभाव डाल सकते हैं।
हाल के वर्षों में पर्यावरण और स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने सौंदर्य प्रसाधनों में मौजूद तत्वों पर कई महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। ड्यूक यूनिवर्सिटी (Duke University) सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के शोध में यह बात सामने आई है कि पारंपरिक नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले कुछ सिंथेटिक केमिकल नाखूनों की सतह और आसपास की त्वचा के माध्यम से शरीर के आंतरिक तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया कैसे होती है और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए सुरक्षित सौंदर्य विकल्प कैसे चुनें।
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नाखून के माध्यम से शरीर में रसायन कैसे पहुंचते हैं?
अक्सर यह माना जाता है कि नाखून एक निर्जीव और पूरी तरह से अभेद्य ढाल की तरह होते हैं, जिसके पार कुछ भी नहीं जा सकता। लेकिन त्वचा विज्ञान (Dermatology) के अनुसार, नाखून वास्तव में केराटिन प्रोटीन की कई परतों से बने होते हैं जो एक छिद्रपूर्ण (porous) संरचना बनाते हैं।
जब नेल पॉलिश लगाई जाती है, तो उसके तरल घटक न केवल नाखून की ऊपरी परत से अवशोषित हो सकते हैं, बल्कि नाखूनों के आसपास की अत्यंत संवेदनशील क्यूटिकल्स (cuticles) और त्वचा की बारीक केशिकाओं (capillaries) के संपर्क में भी आते हैं। क्यूटिकल्स के पास रक्त वाहिकाओं का एक घना जाल होता है, जिसके जरिए रासायनिक तत्व बहुत कम समय में आंतरिक परिसंचरण तंत्र में पहुंच सकते हैं।
TPHP क्या है और यह नेल पॉलिश में क्यों मिलाया जाता है?
शोध में जिस प्रमुख घटक की पहचान की गई है, उसे ट्राइफेनिल फॉस्फेट (Triphenyl Phosphate – TPHP) कहा जाता है।
- लचीलापन और टिकाऊपन: सौंदर्य उद्योग में TPHP का उपयोग मुख्य रूप से ‘प्लास्टिसाइज़र’ (Plasticizer) के रूप में किया जाता है। यह नेल पॉलिश को अधिक लचीला बनाता है ताकि वह जल्दी सूखे, नाखूनों पर आसानी से फैले और उसमें दरारें न पड़ें।
- चमक और मजबूती: यह केमिकल पॉलिश की चमक को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है।
समस्या तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति सप्ताह दर सप्ताह लगातार बिना किसी विराम के ऐसे केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग करता है, जिससे शरीर में इन तत्वों का संचय (accumulation) होने की संभावना बढ़ जाती है।
शरीर के आंतरिक संतुलन पर संभावित प्रभाव
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, TPHP और उसके जैसे अन्य प्लास्टिसाइज़र यौगिक हमारे शरीर के हार्मोनल और मेटाबॉलिक तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं:
1. अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) का संतुलन
यह रसायन उन तत्वों की श्रेणी में आता है जो प्राकृतिक हार्मोनल संकेतों के कामकाज में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। हार्मोन हमारे शरीर में ऊर्जा के स्तर, मूड, नींद चक्र और चयापचय को नियंत्रित करते हैं। इनमें हल्का सा असंतुलन भी दिनचर्या में थकान और बेचैनी ला सकता है।
2. चयापचय और वजन प्रबंधन
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार के सिंथेटिक रसायन लिपिड और वसा के प्राकृतिक नियमन पर असर डाल सकते हैं, जिससे शरीर के वजन प्रबंधन में अप्रत्याशित चुनौतियाँ आ सकती हैं।

3. नाखूनों का प्राकृतिक स्वास्थ्य
लगातार ऐसे तेज केमिकल के संपर्क में रहने से नाखून अपनी प्राकृतिक नमी खो देते हैं। वे पीले, कमजोर और जल्दी टूटने वाले बन जाते हैं।
नेल पॉलिश में पाए जाने वाले अन्य तत्व जिनसे सतर्क रहना चाहिए
TPHP के अलावा पारंपरिक नेल उत्पादों में कई अन्य रसायन भी पाए जाते रहे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सीमित करने की सलाह दी जाती है:
- टोल्यून (Toluene): पॉलिश को चिकना रूप देने वाला विलायक, जिसकी तेज गंध सिरदर्द या सांस में हल्की बेचैनी पैदा कर सकती है।
- फॉर्मलाडेहाइड राल (Formaldehyde Resin): नेल पेंट को सख्त बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो त्वचा में एलर्जी और जलन का कारण बन सकता है।
- डीबीपी (Dibutyl Phthalate): एक अन्य प्लास्टिसाइज़र जिसे अब कई देशों में सुरक्षित विकल्पों से बदला जा रहा है।
सुरक्षित और सुंदर नाखूनों के लिए अपनाएं ये 5 स्मार्ट आदतें
सौंदर्य की देखभाल करते समय अपनी सेहत को सुरक्षित रखना बिल्कुल संभव है। इसके लिए आप इन व्यावहारिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं:
1. ‘गैर-विषैले’ (Non-Toxic / ‘Free’) लेबल वाले उत्पादों का चयन करें
आजकल बाज़ार में ‘5-Free’, ‘7-Free’, ’10-Free’ या ’15-Free’ नेल पॉलिश आसानी से उपलब्ध हैं। इसका अर्थ यह होता है कि निर्माता ने उन 5, 7 या 10 हानिकारक रसायनों (जिनमें TPHP, टोल्यून आदि शामिल हैं) को उत्पाद से पूरी तरह बाहर रखा है। हमेशा सामग्री सूची (Ingredients List) पढ़कर ही खरीदारी करें।
2. नाखूनों को समय-समय पर ‘डिटॉक्स ब्रेक’ दें
हर समय नाखूनों पर पॉलिश लगे रहने देना ठीक नहीं है। महीने में कम से कम 5 से 7 दिन नाखूनों को पूरी तरह प्राकृतिक रहने दें ताकि उन्हें हवा और प्राकृतिक नमी मिल सके।
3. क्यूटिकल्स पर सीधे लगाने से बचें
नेल पॉलिश लगाते समय ध्यान रखें कि ब्रश केवल नाखून की मुख्य प्लेट पर ही रहे और आसपास की संवेदनशील त्वचा या क्यूटिकल्स को न छुए। क्यूटिकल के ऊपर सीधे रंग लगाने से केमिकल का अवशोषण सबसे तेजी से होता है।
4. हवादार स्थान पर प्रयोग करें
नेल पॉलिश लगाते या हटाते समय खिड़कियां खुली रखें ताकि उड़ने वाले वाष्पशील यौगिक (vapors) सीधे सांस के जरिए शरीर में न जाएं।
5. प्राकृतिक तेलों से पोषण दें
नेल पेंट हटाने के बाद अपने नाखूनों और क्यूटिकल्स पर शुद्ध बादाम का तेल, जोजोबा तेल या नारियल तेल लगाएं। यह रासायनिक प्रभाव को कम करके नाखूनों की प्राकृतिक मजबूती लौटाता है।
निष्कर्ष
खूबसूरत और सजे हुए नाखून हर किसी को पसंद आते हैं, लेकिन सौंदर्य का असली आधार उत्तम स्वास्थ्य है। जब हम अपने दैनिक सौंदर्य उत्पादों के प्रति जागरूक होते हैं और सुरक्षित, पारदर्शी फॉर्मूलेशन वाले विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं, तो हम बिना किसी चिंता के अपनी सुंदरता को बनाए रख सकते हैं।