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टिलापिया मछली अपने परिवार को परोसने से पहले दो बार सोचें! इसके पीछे की वजह चौंकाने वाली है

टिलापिया दुनिया के कई हिस्सों में खाई जाने वाली लोकप्रिय मछली है। यह अपेक्षाकृत सस्ती होती है, आसानी से उपलब्ध होती है और इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है। लेकिन इंटरनेट पर टिलापिया को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं—जिनमें इसे प्रदूषण, रसायनों और खराब गुणवत्ता वाली खेती से जोड़कर देखा जाता है।

तो क्या टिलापिया वास्तव में परिवार के लिए खतरनाक है?

जवाब इतना सीधा नहीं है।

टिलापिया को लेकर चिंता आखिर क्यों होती है?

टिलापिया की अधिकांश व्यावसायिक आपूर्ति फार्म में पाली जाती है। इसलिए इसकी गुणवत्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि मछली कहां और किस परिस्थितियों में पाली गई है।

खराब तरीके से संचालित फार्मों में पानी की गुणवत्ता, मछलियों का घनत्व, बीमारी नियंत्रण और दवाओं के इस्तेमाल जैसे मुद्दे चिंता का विषय हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर फार्म में पाली गई टिलापिया असुरक्षित है।

सबसे महत्वपूर्ण बात है मछली का स्रोत

क्या टिलापिया में पारा बहुत ज्यादा होता है?

यह टिलापिया के खिलाफ लगाए जाने वाले सबसे आम दावों में से एक है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक दिशानिर्देश इस धारणा का समर्थन नहीं करते।

अमेरिकी FDA और EPA की मछली संबंधी सलाह में टिलापिया को “Best Choices” वाली मछलियों में शामिल किया गया है, यानी ऐसी मछलियों में जिनमें पारे का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। बच्चों के लिए भी टिलापिया को कम-पारा वाली मछलियों के विकल्पों में शामिल किया गया है।

लगभग सभी मछलियों में थोड़ी मात्रा में मिथाइलमर्करी हो सकती है, लेकिन बड़ी और लंबे समय तक जीवित रहने वाली शिकारी मछलियों में इसका स्तर आमतौर पर अधिक होता है।

इसलिए केवल यह कहना कि “टिलापिया में पारा बहुत अधिक होता है” सही नहीं होगा।

फिर टिलापिया खाने में समस्या क्या हो सकती है?

सबसे बड़ी चिंता अक्सर मछली की प्रजाति से ज्यादा उसकी गुणवत्ता और उत्पादन की परिस्थितियों को लेकर होती है।

यदि मछली दूषित पानी में पाली गई हो या उत्पादन और प्रसंस्करण के दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन न किया गया हो, तो किसी भी प्रकार की मछली में संदूषण का जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा, मछली को कैसे पकाया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण है। बहुत अधिक तेल में तलने के बजाय बेक, ग्रिल या भाप में पकाना आमतौर पर बेहतर विकल्प हो सकता है।

क्या टिलापिया में ओमेगा-3 कम होता है?

यह बात सही है कि टिलापिया सैल्मन जैसी वसायुक्त मछलियों की तुलना में ओमेगा-3 का उतना समृद्ध स्रोत नहीं है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि टिलापिया “हानिकारक” मछली है। मछली केवल ओमेगा-3 के लिए ही नहीं खाई जाती। यह प्रोटीन, विटामिन और कई खनिजों का भी स्रोत हो सकती है।

FDA के अनुसार, मछली सामान्य रूप से प्रोटीन, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड, विटामिन B12, सेलेनियम और अन्य पोषक तत्व प्रदान कर सकती है।

परिवार के लिए टिलापिया खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

अगर आप टिलापिया खरीदते हैं, तो कुछ सरल सावधानियां अपनाना बेहतर है।

मछली को विश्वसनीय स्रोत से खरीदें और पैकेजिंग, भंडारण तथा समाप्ति तिथि की जानकारी देखें। ताजी मछली में असामान्य गंध, चिपचिपी सतह या खराब रंग दिखाई दे तो उसे न खरीदें।

मछली को पर्याप्त तापमान पर अच्छी तरह पकाएं। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए कच्ची या अधपकी मछली से बचना महत्वपूर्ण है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात—हर सप्ताह केवल एक ही प्रकार की मछली खाने के बजाय अलग-अलग कम-पारा वाली मछलियों को आहार में शामिल करना बेहतर है।

तो क्या टिलापिया परिवार के लिए सुरक्षित है?

सिर्फ टिलापिया का नाम सुनकर उससे बचने की जरूरत नहीं है।

उपलब्ध FDA/EPA सलाह में टिलापिया को कम-पारा वाली “Best Choices” मछलियों में रखा गया है। मछली को संतुलित आहार का हिस्सा माना जाता है और बच्चों के लिए भी उचित मात्रा में मछली खाने की सलाह दी जाती है।

इसलिए असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “टिलापिया खतरनाक है या नहीं?”

बल्कि यह होना चाहिए:

मछली कहां से आई है, उसकी गुणवत्ता कैसी है और उसे किस तरह तैयार किया जा रहा है?

यही तीन बातें आपके परिवार के लिए भोजन को सुरक्षित और पौष्टिक बनाने में सबसे ज्यादा मायने रखती हैं।

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