डॉक्टरों की भी राय होती है कि आपको किस करवट सोना चाहिए—और इसके पीछे एक वजह है
बहुत से लोगों की सोने की अपनी आदत होती है। कोई पीठ के बल सोना पसंद करता है, कोई पेट के बल और कुछ लोग हमेशा दाईं या बाईं करवट सोते हैं। लेकिन क्या सोने की दिशा वास्तव में स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है?
जवाब है—कुछ स्थितियों में हां। हालांकि ऐसा कोई एक नियम नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए केवल एक ही करवट सबसे अच्छी होती है। सही स्थिति आपकी उम्र, स्वास्थ्य, गर्भावस्था, सांस लेने की समस्या, एसिड रिफ्लक्स और शरीर के दर्द जैसी चीजों पर निर्भर कर सकती है।

बाईं करवट सोना कब फायदेमंद हो सकता है?
अगर आपको रात में एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की समस्या होती है, तो बाईं करवट सोना विशेष रूप से मददगार हो सकता है।
इस स्थिति में पेट और भोजन नली की स्थिति ऐसी होती है कि पेट का एसिड ऊपर की ओर आने की संभावना कम हो सकती है। इसके विपरीत, दाईं करवट लेटने से कुछ लोगों में रिफ्लक्स बढ़ सकता है।
इसी कारण जिन लोगों को रात में बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या गले में एसिड आने की समस्या होती है, उनके लिए बाईं करवट सोने की सलाह दी जा सकती है।
दाईं करवट सोना क्या गलत है?
नहीं।
स्वस्थ व्यक्ति के लिए दाईं करवट सोना अपने आप में खतरनाक नहीं माना जाता। अधिकांश लोगों के लिए बाईं या दाईं करवट का चुनाव मुख्य रूप से आराम और व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि “दाईं करवट सोना हमेशा नुकसानदायक है।”
अगर आपको दाईं करवट सोने पर अच्छी नींद आती है और कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या नहीं है, तो केवल इस वजह से अपनी आदत बदलने की जरूरत नहीं है।
खर्राटे और स्लीप एपनिया में करवट लेकर सोना उपयोगी हो सकता है
पीठ के बल सोने पर जीभ और गले के आसपास के नरम ऊतक पीछे की ओर खिसक सकते हैं, जिससे कुछ लोगों में वायुमार्ग संकरा हो सकता है।
इसी वजह से खर्राटे या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया वाले कुछ लोगों में करवट लेकर सोने से सांस लेने में सुधार हो सकता है। विशेषज्ञ ऐसे लोगों को अक्सर पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेने की सलाह देते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटों के साथ रात में सांस रुकने, हांफकर उठने या दिन में अत्यधिक नींद आने की समस्या रहती है, तो केवल सोने की स्थिति बदलना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे लक्षणों की चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
गर्भावस्था में कौन-सी करवट बेहतर है?
गर्भावस्था के आगे बढ़ने पर करवट लेकर सोना अधिक आरामदायक और सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि बढ़ता हुआ गर्भाशय पीठ के बल लंबे समय तक लेटने पर बड़ी रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है।
परंपरागत रूप से गर्भवती महिलाओं को बाईं करवट सोने की सलाह दी जाती रही है। लेकिन वर्तमान जानकारी के अनुसार, अगर आप वास्तव में करवट लेकर सो रही हैं, तो दाईं या बाईं—दोनों करवटें सामान्यतः स्वीकार्य हैं।
इसलिए अगर कोई गर्भवती महिला रात में करवट बदल लेती है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। शरीर अक्सर असुविधा होने पर खुद स्थिति बदलने का संकेत देता है।
कमर और गर्दन के दर्द में क्या करें?
अगर आपको पीठ या कमर में दर्द रहता है, तो सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आप किस तरफ सो रहे हैं। शरीर का alignment भी महत्वपूर्ण है।
करवट लेकर सोते समय घुटनों के बीच एक तकिया रखने से कूल्हों और रीढ़ को बेहतर स्थिति में रखने में मदद मिल सकती है। तकिया इतना ऊंचा होना चाहिए कि गर्दन शरीर के बाकी हिस्से के साथ लगभग सीधी रहे।
पीठ के बल सोने वाले लोगों के लिए घुटनों के नीचे छोटा तकिया रखना भी कुछ लोगों को आराम दे सकता है।
तो सबसे अच्छी करवट कौन-सी है?
इसका एक ही जवाब सभी लोगों के लिए नहीं है।
एसिड रिफ्लक्स: बाईं करवट अक्सर बेहतर हो सकती है।
खर्राटे या स्लीप एपनिया: करवट लेकर सोना पीठ के बल सोने से बेहतर हो सकता है।
गर्भावस्था: करवट लेकर सोना बेहतर है; बाईं करवट आदर्श हो सकती है, लेकिन दाईं करवट भी सामान्यतः ठीक है।
सामान्य स्वस्थ व्यक्ति: जिस स्थिति में आपको आरामदायक और लगातार अच्छी नींद मिलती है, वही आपके लिए उपयुक्त हो सकती है।
इसलिए अगली बार जब आप सोने जाएं, तो सिर्फ यह सोचने के बजाय कि “कौन-सी करवट सबसे अच्छी है?”, अपने शरीर के संकेतों पर भी ध्यान दें।
अगर किसी विशेष करवट पर आपको सांस लेने में परेशानी, लगातार सीने में जलन, गर्दन या कमर में दर्द या बार-बार नींद टूटने की समस्या होती है, तो समस्या सिर्फ आपकी सोने की आदत नहीं भी हो सकती है।
अच्छी नींद का मतलब केवल कितने घंटे सोना नहीं है—बल्कि ऐसी स्थिति में सोना भी है जिसमें आपका शरीर रातभर आराम कर सके।