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होटल में चेक-इन करने के बाद कुछ यात्री टॉयलेट में उबलता पानी क्यों डालते हैं?

होटल में चेक-इन करने के बाद कुछ यात्रियों की एक अजीब आदत आपने शायद देखी होगी। वे कमरे में सामान रखने से पहले ही इलेक्ट्रिक केतली में पानी उबालते हैं और फिर उसे सीधे टॉयलेट में डाल देते हैं।

पहली नजर में यह काफी अजीब लगता है। आखिर कोई होटल के टॉयलेट में उबलता पानी क्यों डालेगा?

इस आदत के पीछे मुख्य कारण स्वच्छता को लेकर चिंता है। कुछ यात्रियों का मानना है कि होटल का टॉयलेट पहले कई मेहमानों द्वारा इस्तेमाल किया जा चुका होता है और गर्म या उबलता पानी उसमें मौजूद बैक्टीरिया तथा अन्य सूक्ष्मजीवों को कम करने में मदद कर सकता है। कुछ लोग इसे टॉयलेट को इस्तेमाल करने से पहले अतिरिक्त सावधानी के तौर पर करते हैं।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है।

क्या उबलता पानी वास्तव में टॉयलेट को कीटाणुरहित कर देता है?

गर्मी निश्चित रूप से कई सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय कर सकती है। CDC के अनुसार, पर्याप्त तापमान और पर्याप्त समय तक गर्म करने पर पानी में मौजूद कई रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक केतली का उबलता पानी टॉयलेट में डालने से पूरा टॉयलेट अपने आप कीटाणुरहित हो जाएगा।

कीटाणुशोधन की प्रभावशीलता केवल तापमान पर निर्भर नहीं करती। संपर्क का समय, सतह का प्रकार, गंदगी या जैविक पदार्थ की मौजूदगी और यह भी महत्वपूर्ण है कि गर्म पानी वास्तव में दूषित सतह के हर हिस्से तक पहुंचा या नहीं।

टॉयलेट में पानी डालते ही वह ठंडा होना शुरू हो जाता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि थोड़ी मात्रा में उबलता पानी डालने से टॉयलेट में मौजूद सभी बैक्टीरिया या वायरस खत्म हो जाएंगे।

फिर लोग ऐसा क्यों करते हैं?

इसका एक कारण मनोवैज्ञानिक भी हो सकता है।

जब कोई व्यक्ति किसी होटल में ठहरता है, तो उसे यह पता नहीं होता कि उससे पहले कमरे में कौन रहा था और बाथरूम की सफाई कितनी अच्छी तरह हुई थी। उबलता पानी डालने जैसी छोटी-सी प्रक्रिया उसे यह महसूस करा सकती है कि उसने अपनी तरफ से अतिरिक्त सावधानी बरती है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि गर्म पानी टॉयलेट में मौजूद हल्की गंदगी, अवशेष या दुर्गंध को हटाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, सफाई का एहसास और वास्तविक कीटाणुशोधन एक ही चीज नहीं हैं।

उबलता पानी डालने में एक और समस्या है

बहुत गर्म या उबलता पानी हमेशा बेहतर नहीं होता।

टॉयलेट में सिरेमिक या पोर्सिलेन के हिस्से और विभिन्न प्लंबिंग कंपोनेंट होते हैं। अचानक बहुत अधिक तापमान के संपर्क में आने से कुछ सामग्रियों पर थर्मल स्ट्रेस पड़ सकता है और नुकसान का जोखिम पैदा हो सकता है। इसके अलावा, गर्म पानी डालते समय छींटे पड़ने से जलने का खतरा भी हो सकता है।

यानी जिस काम को लोग अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कर रहे हैं, वह जरूरी नहीं कि वास्तव में अधिक सुरक्षित हो।

होटल पहुंचते ही आपको क्या करना चाहिए?

अगर आप होटल के बाथरूम की स्वच्छता को लेकर चिंतित हैं, तो उबलता पानी डालने के बजाय कुछ सरल कदम ज्यादा उपयोगी हैं।

सबसे पहले बाथरूम को एक बार देख लें। अगर कोई सतह गंदी दिखाई देती है, तो होटल के कर्मचारियों से सफाई करवाएं या उपयुक्त डिसइंफेक्टेंट का इस्तेमाल करें।

टॉयलेट के अलावा दरवाजे के हैंडल, नल और अन्य बार-बार छुई जाने वाली सतहों पर भी ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक है।

और सबसे महत्वपूर्ण बात है हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना।

हाथ कई सतहों को छूते हैं और फिर अनजाने में मुंह, नाक या आंखों तक पहुंच सकते हैं। इसलिए हाथों की स्वच्छता किसी वायरल होटल ट्रिक से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

तो क्या होटल में टॉयलेट में उबलता पानी डालना जरूरी है?

नहीं।

उबलता पानी कुछ अवशेषों को धोने या ढीला करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे होटल के टॉयलेट को सुरक्षित रूप से कीटाणुरहित करने का भरोसेमंद तरीका नहीं माना जाना चाहिए।

अगर टॉयलेट साफ दिखाई देता है, तो सामान्य रूप से इस्तेमाल करना पर्याप्त है। अगर सफाई संदिग्ध लगती है, तो होटल स्टाफ से सफाई करवाना ज्यादा उचित विकल्प है।

इसलिए अगली बार होटल में चेक-इन करते समय अगर कोई आपको बताए कि “टॉयलेट में तुरंत उबलता पानी डालो, यही असली होटल ट्रिक है,” तो तुरंत केतली उठाने से पहले दो बार जरूर सोचें।

कभी-कभी सबसे अच्छी ट्रैवल टिप कोई नया हैक अपनाना नहीं, बल्कि यह जानना होता है कि कौन-सा वायरल हैक वास्तव में जरूरी नहीं है।

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